शांति, संस्कृति और सद्भाव का कश्मीर चाहिए फिर से
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस बीआर गवई ने रविवार को राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (एनएएलएसए) के उत्तरी क्षेत्र क्षेत्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि कश्मीर को उसके पुराने स्वरूप में लौटाने की जरूरत है, जहां सभी समुदाय सद्भाव के साथ रहते थे। जस्टिस गवई ने अतीत की विसंगतियों को दूर करने और कश्मीर को उसके पुराने स्वरूप में लौटाने की जरूरत बताई। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि ज्ञान के बिना अधिकार किसी काम के नहीं हैं। उन्होंने नागरिकों को उनके अधिकारों के बारे में जागरूक करने के महत्त्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि न्यायाधीशों और वकीलों को मिलकर देश के अंतिम नागरिक के लिए न्याय सुनिश्चित करना होगा।
नालसा इसी दिशा में काम करता है। हम नालसा के काम को देश के दूरदराज के इलाकों तक ले जाने की कोशिश कर रहे हैं, चाहे वह लद्दाख हो, पूर्वोत्तर हो या राजस्थान। जब तक लोगों को अपने अधिकारों का ज्ञान नहीं होगा, तब तक इन अधिकारों का कोई मतलब नहीं है। कश्मीर की पिछले 35 सालों की स्थिति का स्पष्ट संदर्भ देते हुए चीफ जस्टिस ने कहा कि कुछ विसंगतियां रही हैं, जिन्हें दूर करने की आवश्यकता है। न्यायाधीशों और वकीलों के बीच यह संवाद एक नया दृष्टिकोण प्रदान करेगा। मुझे विश्वास है कि यह कार्यक्रम उस पारंपरिक कश्मीर के पुनर्निर्माण में मदद करेगा, जहां सभी समुदाय-हिंदू, मुस्लिम और सिख-एक साथ रहते थे।
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