जबलपुर,  मध्यप्रदेश के ऊर्जा मंत्री  प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बिजली ट्रिपिंग की बढ़ती समस्या पर सख्त रुख अपनाते हुए विभागीय अधिकारियों को आड़े हाथों लिया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब स्मार्ट मीटर लग चुके हैं और मेंटेनेंस कार्य भी पूरे हो गए हैं, तो फिर भी बिजली गुल क्यों हो रही है? शनिवार को मंत्रालय में विभागीय योजनाओं की समीक्षा बैठक के दौरान उन्होंने लापरवाह इंजीनियरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी।


 

एम.डी. को दिए निर्देश: लापरवाही पर होगी सीधी कार्रवाई

 

ऊर्जा मंत्री श्री तोमर ने सभी डिस्कॉम के प्रबंध निदेशकों (एम.डी.) को निर्देश दिए कि वे ट्रिपिंग की समस्या की गंभीरता से समीक्षा करें और जहाँ भी लापरवाही पाई जाए, वहाँ दोषी अधिकारियों की जवाबदेही तय करें। उन्होंने साफ कहा कि मुख्य अभियंता (सीई) और अधीक्षण यंत्री (एसई) नियमित रूप से मेंटेनेंस कार्यों का निरीक्षण करें और इससे संबंधित सभी विवरण वितरण केंद्रों के रजिस्टर में अनिवार्य रूप से दर्ज किए जाएं।

श्री तोमर ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि सीई और एसई अपने कर्तव्यों का ठीक से पालन नहीं करते पाए गए, तो उन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी और उनके अधीनस्थ अधिकारियों को प्रभार सौंपने पर भी विचार किया जाएगा। वहीं, अच्छा प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को सम्मानित करने की बात भी उन्होंने दोहराई।


 

इंदौर बनेगा ट्रिपिंग-फ्री मॉडल, सुरक्षा और सामग्री पर विशेष जोर

 

ऊर्जा मंत्री ने इंदौर को ट्रिपिंग-फ्री शहर बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जिस तरह इंदौर ने स्वच्छता में देश का गौरव बढ़ाया है, उसी तरह वह बिजली ट्रिपिंग के मामले में भी एक उदाहरण बने। अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि वे स्मार्ट मीटर वाले घरों में उपभोक्ताओं को लोड वृद्धि के लिए प्रेरित करें, जिससे बिजली खपत के वास्तविक आंकड़े मिल सकें।

सुरक्षा के मद्देनजर, ऊर्जा मंत्री ने खुले डिस्ट्रीब्यूशन बॉक्स पर फाइबर के ढक्कन लगाने और सभी ट्रांसफार्मरों के चारों ओर अनिवार्य रूप से फेंसिंग करवाने के निर्देश दिए। उन्होंने यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि विद्यालय परिसरों से गुजरने वाली बिजली लाइनों की गार्डिंग (सुरक्षा कवच) की जाए, ताकि किसी भी अप्रिय दुर्घटना की आशंका को पूरी तरह खत्म किया जा सके। साथ ही, मेंटेनेंस में उपयोग होने वाली सभी आवश्यक सामग्री की स्टोर और वितरण केंद्र स्तर पर पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। उन्होंने विभागीय योजनाओं के व्यापक प्रचार-प्रसार के भी निर्देश दिए।


 

10 वितरण केंद्र बनेंगे मॉडल, बिलिंग और विश्लेषण पर फोकस

 

बैठक में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया कि तीनों बिजली कंपनियों के सर्वाधिक ट्रिपिंग और लाइन लॉस वाले 10 वितरण केंद्रों को मॉडल के रूप में विकसित किया जाएगा। इन केंद्रों के जूनियर इंजीनियर और असिस्टेंट इंजीनियर से सीधे बातचीत कर उन्हें आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया। यदि तीन माह में इन मॉडल केंद्रों से अपेक्षित परिणाम मिलते हैं, तो इस योजना का विस्तार अन्य केंद्रों तक भी किया जाएगा।

अपर मुख्य सचिव ऊर्जा श्री नीरज मण्डलोई ने स्मार्ट मीटर के बाद उपभोक्ताओं को दिए जाने वाले बिल में पुराने बकाया का स्पष्ट उल्लेख करने के निर्देश दिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि तेज रीडिंग की शिकायतें आती हैं, तो पुराने मीटर लगाकर समानांतर जांच की जाए। मेंटेनेंस के लिए नवीन उपकरणों के उपयोग और शेड्यूल किए गए कार्यों को उसी दिन पूरा करने पर भी जोर दिया गया।