जबलपुर,  मध्यप्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी सीएम हेल्पलाइन योजना पर जबलपुर जिले में गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। रांझी क्षेत्र के नागरिकों ने आरोप लगाया है कि पुलिस विभाग उनकी गंभीर शिकायतों को बिना किसी ठोस कार्रवाई के, सिर्फ फोन पर ओटीपी लेकर बंद कर रहा है। इससे न केवल जनता का सरकार और पुलिस पर से भरोसा उठ रहा है, बल्कि असामाजिक तत्वों का मनोबल भी बढ़ रहा है।

बढ़ती असामाजिक गतिविधियों पर जताई थी चिंता, मिला सिर्फ 'निराकरण' का धोखा
रांझी क्षेत्र के निवासी प्रेम कुमार ओझा, मधु ओझा और श्रुति ओझा ने क्षेत्र में बढ़ती असामाजिक गतिविधियों, गुंडागर्दी और अपराधियों के आतंक से परेशान होकर सीएम हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराई थी। उनका मकसद था कि पुलिस इन समस्याओं पर ध्यान दे और क्षेत्र में शांति व्यवस्था बहाल हो सके। नागरिकों को उम्मीद थी कि सीएम हेल्पलाइन के जरिए उनकी बात सीधे सरकार तक पहुंचेगी और त्वरित समाधान मिलेगा।

बिना जांच, बिना कार्रवाई, सिर्फ ओटीपी मांगकर शिकायतें बंद करने का आरोप
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि पुलिस ने शिकायत पर कोई भी ज़मीनी कार्रवाई नहीं की। न तो मौके का मुआयना किया गया और न ही किसी तरह की जांच की गई। बल्कि, पुलिसकर्मियों ने उन्हें फोन किया और ओटीपी (वन टाइम पासवर्ड) मांगकर शिकायत को 'निराकृत' (हल) दिखा दिया। इस तरह, शिकायतों का कोई ठोस समाधान नहीं हुआ, और नागरिक अपनी समस्याओं से जूझते रहे।

पीड़ितों ने दुख जताते हुए कहा कि उन्होंने सीएम हेल्पलाइन पर यह सोचकर विश्वास किया था कि सरकार आम जनता की समस्याओं को गंभीरता से लेगी। लेकिन पुलिस की इस कार्यप्रणाली से उन्हें ठगा हुआ महसूस हो रहा है। उनका कहना है कि जब शिकायतें इस तरह बिना समाधान के बंद कर दी जाएंगी, तो जनता का सिस्टम पर से भरोसा उठना स्वाभाविक है, और इसका सीधा फायदा असामाजिक तत्वों को मिलेगा, क्योंकि उन्हें लगेगा कि उन पर कोई कार्रवाई नहीं होगी।

क्या सीएम हेल्पलाइन सिर्फ आंकड़ों का खेल?
यह घटना सीएम हेल्पलाइन के वास्तविक उद्देश्य पर प्रश्नचिह्न लगाती है। क्या यह योजना केवल सरकारी आंकड़ों में शिकायतों के 'निराकरण' की संख्या बढ़ाने के लिए है, या वास्तव में इसका उद्देश्य जनता की समस्याओं का ज़मीनी स्तर पर समाधान करना है? इस तरह की लापरवाही से स्पष्ट होता है कि ज़मीनी हकीकत की अनदेखी की जा रही है।

पीड़ितों ने मांग की है कि इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की जाए। उन्होंने संबंधित पुलिस अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई और उनकी शिकायतों की निष्पक्ष जांच कर ठोस समाधान सुनिश्चित करने की अपील की है, ताकि भविष्य में कोई भी आम नागरिक खुद को इस तरह से ठगा हुआ महसूस न करे और सरकार की जन-कल्याणकारी योजनाओं पर उसका भरोसा बना रहे।