सतना: ईरान और इज़रायल के बीच तनावपूर्ण माहौल में दो महीने तक ईरान के बंदर अब्बास शहर में फंसे सतना के आकाश द्विवेदी अंततः सुरक्षित अपने घर लौट आए हैं। शुक्रवार को उनके सतना स्थित पौराणिक टोला निवास पर पहुंचने के बाद परिवार में खुशी का माहौल है। आकाश और उनके पिता चंद्रभूषण द्विवेदी ने इस मुश्किल घड़ी में मदद के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और सतना कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस का हृदय से आभार व्यक्त किया है।

दरअसल आकाश द्विवेदी ने अक्टूबर 2021 में मर्चेंट नेवी का कोर्स पूरा किया था और इसी साल 17 मार्च 2025 को वह एक शिपिंग कंपनी ज्वाइन करने ईरान पहुंचे थे। शुरुआती डेढ़ महीने सब कुछ सामान्य रहा, लेकिन जून 2025 में ईरान और इज़रायल के बीच बढ़े तनाव के कारण हालात बिगड़ने लगे। युद्ध की आशंका के चलते ईरान में सभी जहाजों की आवाजाही रोक दी गई थी।

आकाश ने बताया कि उनका जहाज भी बंदरगाह पर खड़ा हो गया। जहाज पर मौजूद 17 सदस्यों के क्रू में से ज्यादातर स्थानीय लोग अपने घर चले गए, जिसके बाद जहाज पर आकाश समेत केवल 6 लोग ही बचे थे। इस दौरान जहाज पर नेटवर्क की भी गंभीर समस्या थी। जिससे उनका परिवार से संपर्क लगभग टूट गया था। पासपोर्ट कंपनी में जमा था और वापसी का वीजा भी नहीं था। जिससे उनकी घर वापसी की उम्मीदें धूमिल होती जा रही थीं।

पिता के प्रयास और प्रशासन की त्वरित कार्रवाई

बेटे की सलामती को लेकर चिंतित पिता चंद्रभूषण द्विवेदी, जो स्वयं पुलिस में कांस्टेबल हैं। उन्होंने मदद के लिए कलेक्टर कार्यालय का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने सतना कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस से मुलाकात कर अपनी पूरी व्यथा बताई। कलेक्टर ने मामले की गंभीरता को समझते हुए तुरंत कार्रवाई की।

14 जुलाई को कलेक्टर कार्यालय से दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास को पत्र लिखकर पूरे मामले से अवगत कराया गया। कलेक्टर की इस पहल पर दूतावास ने ईरान की संबंधित शिपिंग कंपनी से संपर्क साधा और आकाश की जानकारी जुटाई। आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद कंपनी ने न केवल आकाश का वीजा बनवाया, बल्कि उनके टिकट की भी व्यवस्था की।

दो महीने बाद लौटी मुस्कान

प्रशासनिक प्रयासों के फलीभूत होने पर आकाश द्विवेदी को 31 जुलाई की सुबह ईरान के शिराज शहर से विमान द्वारा मुंबई के लिए रवाना किया गया। वह उसी दिन रात 9:30 बजे मुंबई पहुंचे, जहां से उनके परिजन उन्हें सतना ले आए। दो महीने की अनिश्चितता और तनाव के बाद अपने बेटे को सकुशल सामने पाकर परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं है। आकाश और उनके परिवार ने इस सफल वापसी का श्रेय मुख्यमंत्री और जिला प्रशासन के अथक प्रयासों को दिया है।