जबलपुर में अवैध अस्पताल सील: बिना पंजीकरण चल रहा था 'सुलिखिया हॉस्पिटल', संचालकों पर केस दर्ज
जबलपुर, जबलपुर के गोराबाजार थाना क्षेत्र में बिना पंजीकरण के एक अस्पताल चलाने और नियमों की घोर अनदेखी करने के आरोप में 'सुलिखिया हॉस्पिटल' के संचालकों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। कलेक्टर के निर्देश पर गठित गरुड़ दल की टीम ने अस्पताल का औचक निरीक्षण किया, जिसमें कई गंभीर अनियमितताएं पाई गईं, जिसके बाद अस्पताल को सील कर दिया गया।
सीएमएचओ कार्यालय की रिपोर्ट पर कार्रवाई
यह कार्रवाई कार्यालय मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ), जबलपुर की रिपोर्ट पर की गई। सीएमएचओ डॉ. संजय मिश्रा के निर्देश पर उनके लिपिक आकाश गुप्ता ने गोराबाजार थाने में एक प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। इस प्रतिवेदन में बताया गया कि बिलहरी स्थित 'सुलिखिया हॉस्पिटल' के संचालक रमेश सुलिखिया और डॉ. दिव्यांश सुलिखिया (दोनों निवासी पोस्ट ऑफिस के सामने, बिलहरी) अवैध रूप से बिना पंजीकरण के अस्पताल का संचालन कर रहे थे। आरोप है कि वे आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति के अनुसार इलाज नहीं कर रहे थे और मरीजों के साथ धोखाधड़ी कर रहे थे।
गरुड़ दल के निरीक्षण में मिलीं गंभीर खामियां
शिकायत प्राप्त होने पर एसडीएम जयसिंह धुर्वे के नेतृत्व में गरुड़ दल टीम ने सुलिखिया क्लिनिक (पोस्ट ऑफिस के सामने, बिलहरी) का औचक निरीक्षण किया। मौके पर जांचकर्ता अधिकारियों द्वारा पंचनामा तैयार किया गया, जिसमें निम्नलिखित गंभीर कमियां पाई गईं:
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बिना पंजीकरण 8 बिस्तर वाला अस्पताल: अस्पताल का कोई वैध पंजीकरण नहीं पाया गया, जबकि यह 8 बिस्तरों वाले अस्पताल के रूप में संचालित हो रहा था।
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बायोमेडिकल वेस्ट प्रबंधन का अभाव: अस्पताल में बायोमेडिकल वेस्ट (जैविक कचरा) और पर्यावरण प्रबंधन की कोई व्यवस्था नहीं थी। कचरे के संग्रहण, निपटान की कोई विधिवत व्यवस्था नहीं थी और न ही इससे संबंधित कोई दैनिक रिकॉर्ड प्रस्तुत किया गया।
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फायर एनओसी और उपकरणों की कमी: अस्पताल के पास फायर सेफ्टी के लिए कोई एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) नहीं था। आग बुझाने के लिए आवश्यक उपकरण भी मौके पर उपलब्ध नहीं थे और न ही आग लगने की स्थिति में मरीजों या स्टाफ को बाहर निकालने की कोई स्पष्ट व्यवस्था थी।
मध्य प्रदेश उपचार गृह तथा रुजोषोपचार संबंधी स्थापनाएं (रजिस्ट्रीकरण तथा अनुज्ञापन) अधिनियम 1973 की धारा 3 के अंतर्गत सभी मान्यता प्राप्त चिकित्सा पद्धतियों के तहत संचालित सभी क्लीनिकल स्थापनाओं का पंजीकरण अनिवार्य है।
अस्पताल सील, संचालकों पर कई धाराओं में केस दर्ज
नियमों की घोर अनदेखी पाए जाने पर गरुड़ दल टीम द्वारा रमेश सुलिखिया और डॉ. दिव्यांश सुलिखिया के 'सुलिखिया हॉस्पिटल' को सील कर दिया गया।
प्राप्त प्रतिवेदन के आधार पर, सुलिखिया हॉस्पिटल के संचालक रमेश सुलिखिया और डॉ. दिव्यांश सुलिखिया (दोनों निवासी पोस्ट ऑफिस के सामने, बिलहरी, थाना गोराबाजार) के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) (धोखाधड़ी), 3(5) (षड्यंत्र) और नेशनल मेडिकल कमीशन एक्ट 2019 की धारा 34, मध्य प्रदेश आयुर्विज्ञान परिषद अधिनियम 1987 की धारा 21(24), तथा मध्य प्रदेश उपचार गृह तथा रुजोषोपचार संबंधी स्थापना अधिनियम 1973 की धारा 3, 8 (क)(i)(ii) के तहत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया है।
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