भोपाल, मध्य प्रदेश में पत्रकारों की मान्यता, सुरक्षा, और उन्हें मिलने वाली सुविधाओं को लेकर राज्य सरकार ने विधानसभा में विस्तृत जानकारी साझा की है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा दिए गए जवाबों से जहाँ एक ओर पत्रकारों के कल्याण के लिए कई योजनाओं के संचालन का पता चलता है, वहीं दूसरी ओर उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने और गंभीर परिस्थितियों में पर्याप्त सहायता प्रदान करने की दिशा में अभी भी कई चुनौतियाँ बरकरार हैं।


 

पत्रकार मान्यता: नई मान्यताओं से ज़्यादा नवीनीकरण

 

मुख्यमंत्री द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार, मध्य प्रदेश में अधिमान्य पत्रकारों को उनके कार्यक्षेत्र के आधार पर तीन प्रमुख श्रेणियों में मान्यता दी जाती है: राज्य स्तरीय, जिला स्तरीय और तहसील स्तरीय।

वर्ष 2019 से लेकर अब तक, राज्य में कुल 1,237 नए पत्रकारों को अधिमान्यता प्रदान की गई है। वहीं, इस दौरान 15,519 अधिमान्य पत्रकारों की मान्यताओं का नवीनीकरण किया गया है, जो प्रदेश में पत्रकारों की एक बड़ी सक्रिय संख्या को दर्शाता है। वर्तमान में, पूरे प्रदेश में कुल 3,767 पत्रकार अधिमान्यता प्राप्त हैं, जिनकी जिलेवार जानकारी सरकार ने पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट में उपलब्ध कराई है।


 

पत्रकारों को मिल रही कल्याणकारी सुविधाएँ: एक सिंहावलोकन

 

सरकार अधिमान्य पत्रकारों और उनके परिवारों के लिए विभिन्न कल्याणकारी योजनाएँ संचालित कर रही है, जिनका उद्देश्य उन्हें सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना है:

  • आवास ऋण ब्याज अनुदान योजना: इस योजना के तहत पत्रकारों को आवास निर्माण या खरीद के लिए लिए गए ऋण पर ब्याज में सब्सिडी दी जाती है। अब तक 197 पत्रकार इस योजना का लाभ उठाकर अपने सपनों का घर बना चुके हैं।

  • वरिष्ठ पत्रकार सम्मान निधि: यह निधि अनुभवी पत्रकारों के योगदान को सम्मान देने और उन्हें वृद्धावस्था में आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से दी जाती है। वर्तमान में, 426 वरिष्ठ पत्रकारों को प्रतिमाह सम्मान निधि प्रदान की जा रही है।

  • पत्रकार स्वास्थ्य एवं दुर्घटना समूह बीमा योजना: यह योजना पत्रकारों और उनके आश्रितों को स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थितियों और दुर्घटनाओं से सुरक्षा प्रदान करती है। मुख्यमंत्री के अनुसार, इस योजना के अंतर्गत अब तक कुल 5,482 पत्रकारों द्वारा लाभ उठाया गया है, जो बड़ी संख्या में पत्रकारों को कवरेज प्रदान करता है।

  • आर्थिक सहायता: गंभीर परिस्थितियों में सरकार पत्रकारों और उनके परिवारों के साथ खड़ी दिखती है। अब तक, 14 पत्रकारों को मृत्यु उपरांत उनके परिवार को आर्थिक सहायता प्रदान की गई है। इसके अतिरिक्त, 139 पत्रकारों को स्वयं अथवा उनके आश्रितों को गंभीर बीमारी की स्थिति में आर्थिक सहायता स्वीकृत की गई है। इन सभी योजनाओं के नियम, निर्देश और आदेशों की छायाप्रति पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट में उपलब्ध कराई गई है।


 

पत्रकार सुरक्षा कानून पर मंथन जारी, तात्कालिक सहायता पर सवाल

 

पत्रकारों की सुरक्षा और स्वतंत्रता, जो किसी भी मजबूत लोकतंत्र के लिए अनिवार्य स्तंभ हैं, सुनिश्चित करने हेतु सरकार कदम उठा रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि मध्य प्रदेश में पत्रकार सुरक्षा कानून बनाने के संबंध में देश के अन्य राज्यों में प्रचलित प्रावधानों का अध्ययन करने के लिए सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा 20 सितंबर, 2023 को एक समिति का गठन किया गया है। इस समिति की बैठक 05 अक्टूबर, 2023 को भी आयोजित की गई थी, जिससे यह स्पष्ट होता है कि इस दिशा में विचार-विमर्श जारी है।

हालांकि, तात्कालिक सहायता के संदर्भ में, यदि किसी पत्रकार पर हमला होता है अथवा पत्रकार या उसके परिवार के किसी सदस्य को गंभीर बीमारी होती है, तो शासन द्वारा अधिकतम ₹1.00 लाख तक की आर्थिक सहायता दिए जाने का प्रावधान है। पत्रकारों और उनके संगठनों का मानना है कि यह राशि गंभीर बीमारियों के इलाज या हमले के बाद होने वाले दीर्घकालिक नुकसान की भरपाई के लिए अक्सर अपर्याप्त प्रतीत होती है, विशेषकर जब चिकित्सा का खर्च लाखों में पहुँच जाता है। सहायता देने की प्रक्रिया से संबंधित जानकारी भी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट में संलग्न है।


 

आवास एवं कार्यालय सुविधा: जानकारी अभी भी अधूरी

 

अधिमान्य पत्रकारों को विभाग द्वारा किन-किन नगरों में आवास एवं कार्यालय संचालन की सुविधा उपलब्ध कराई गई है, इस महत्वपूर्ण बिंदु पर सरकार की ओर से अभी पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है। मुख्यमंत्री ने बताया है कि इस संबंध में जानकारी अभी भी एकत्रित की जा रही है, और इसे जल्द ही उपलब्ध कराया जाएगा। यह दर्शाता है कि पत्रकारों को मिलने वाली कुछ बुनियादी सुविधाओं का डेटाबेस अभी पूरी तरह से संकलित नहीं है, या पारदर्शिता में कमी है।