मालेगांव ब्लास्ट: साध्वी प्रज्ञा बरी होने पर सियासी घमासान, विधायक आरिफ मसूद बोले- "आतंकवाद का कोई मजहब नहीं"
जबलपुर,: 2008 के मालेगांव बम धमाके मामले में लंबी कानूनी लड़ाई के बाद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर के बरी होने पर देश की सियासत में हलचल तेज हो गई है। इस फैसले पर भोपाल से कांग्रेस के फायरब्रांड विधायक आरिफ मसूद ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने एक महत्वपूर्ण बयान देते हुए कहा है कि "आतंकवाद का कोई मजहब नहीं होता, न आतंकवाद का कोई मजहब से ताल्लुक है, यह व्यक्ति विशेष का ताल्लुक होता है।" मसूद के इस बयान से एक बार फिर आतंकवाद और उसके कथित धार्मिक जुड़ाव को लेकर पुरानी बहस छिड़ गई है।
"महाराष्ट्र सरकार फैसले के खिलाफ अपील करे"
आरिफ मसूद ने साध्वी प्रज्ञा के बरी होने के फैसले पर अपनी असहमति जताते हुए सीधे तौर पर महाराष्ट्र सरकार से अपील करने की मांग की है। उन्होंने कहा, "अगर न्यायालय ने उन्हें (साध्वी प्रज्ञा) बरी किया है, जिस तरह बॉम्बे ब्लास्ट (के कुछ आरोपियों) को बरी किया गया है, हम चाहते हैं कि बॉम्बे सरकार (महाराष्ट्र सरकार) इस फैसले के खिलाफ फिर से अपील करे।"
मसूद का यह बयान ऐसे समय में आया है जब मालेगांव ब्लास्ट का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है और इस पर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। उनके इस आह्वान के बाद अब सबकी निगाहें महाराष्ट्र सरकार पर टिकी हैं कि क्या वह इस संवेदनशील मामले में आगे कोई कानूनी कदम उठाती है।
मालेगांव ब्लास्ट और साध्वी प्रज्ञा का मामला
गौरतलब है कि 29 सितंबर 2008 को महाराष्ट्र के मालेगांव में हुए बम धमाके में छह लोग मारे गए थे और 100 से अधिक घायल हुए थे। इस मामले में साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर मुख्य आरोपियों में से एक थीं और उन्हें कई सालों तक जेल में रहना पड़ा था। हालांकि, बाद में उन्हें जमानत मिल गई थी और वे भोपाल से लोकसभा सांसद चुनी गईं। इस मामले में लंबी सुनवाई के बाद अब उन्हें बरी कर दिया गया है।आरिफ मसूद के इस बयान ने मामले को फिर से सुर्खियों में ला दिया है और भविष्य में इस पर कानूनी और राजनीतिक घमासान जारी रहने की संभावना है।
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