जबलपुर: फर्जी पते और जाली दस्तावेजों के आधार पर पासपोर्ट बनाने वाले एक बड़े रैकेट का खुलासा हुआ है। इस मामले में एटीएस (आतंकवाद निरोधक दस्ता) ने एक और अफगानी नागरिक अकबर को पश्चिम बंगाल से गिरफ्तार किया है। अकबर पिछले 20 सालों से भारत में फर्जी दस्तावेजों के सहारे रह रहा था। उसकी गिरफ्तारी के साथ, इस रैकेट में शामिल कुल 5 लोगों को पकड़ा जा चुका है।

इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब एटीएस ने शनिवार को जबलपुर से एक अफगानी नागरिक सोहबत खान को गिरफ्तार किया था। सोहबत से पूछताछ के बाद, पुलिस ने इस रैकेट के मास्टरमाइंडों तक पहुंच बनाई, जिनमें सरकारी कर्मचारी दिनेश गर्ग, महेंद्र कुमार और चंदन सिंह शामिल हैं।

 

कैसे चलता था यह रैकेट?

 

जांच में सामने आया है कि इस गिरोह ने जबलपुर को अवैध पासपोर्ट बनाने का अड्डा बना रखा था। सरकारी कर्मचारी दिनेश गर्ग अपने साथियों महेंद्र कुमार और चंदन सिंह के साथ मिलकर अफगानी नागरिकों के लिए फर्जी आधार कार्ड और अन्य भारतीय दस्तावेज तैयार करते थे। इन्हीं जाली दस्तावेजों के आधार पर जबलपुर के पासपोर्ट कार्यालय से लगभग 10 अफगानी नागरिकों के पासपोर्ट जारी करवाए गए।

पुलिस को मिली जानकारी के अनुसार, इन फर्जी पासपोर्टों को बनवाने के लिए प्रति व्यक्ति 10 लाख रुपये तक की मोटी रकम ली गई थी। जांच में यह भी पता चला है कि जिन 10 अफगानी नागरिकों के लिए ये जाली पासपोर्ट बनवाए गए, वे फिलहाल पश्चिम बंगाल, बिहार और झारखंड जैसे राज्यों में रह रहे हैं।

 

गिरफ्तार किए गए आरोपियों का विवरण:

 

  1. सोहबत खान: अफगानी नागरिक (जबलपुर से गिरफ्तार)

  2. अकबर: अफगानी नागरिक (पश्चिम बंगाल से गिरफ्तार)

  3. महेंद्र कुमार: कटंगा, जबलपुर निवासी

  4. दिनेश गर्ग: विजय नगर, जबलपुर निवासी (सरकारी कर्मचारी)

  5. चंदन सिंह: रामपुर, जबलपुर निवासी

पुलिस ने सभी पांचों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। आज उन्हें मेडिकल जांच के लिए जिला अस्पताल लाया गया, जिसके बाद उन्हें कोर्ट में पेश किया जाएगा। इस मामले में पुलिस अब बाकी बचे अफगानी नागरिकों और इस रैकेट से जुड़े अन्य लोगों की तलाश कर रही है।