मेडिकल कॉलेज जबलपुर में आर्गन ट्रांसप्लांटः जबलपुर का दिल गुजरात में धड़केगा, लीवर का इस्तेमाल भोपाल में होगा
नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में एक ब्रेन डेड मरीज के अंगदान ने कई लोगों को नया जीवन दिया है। आज सुबह 8.30 बजे से शुरू हुई इस प्रक्रिया में मरीज के अंगों को सुरक्षित निकालने के बाद उन्हें दो अलग-अलग शहरों में भेजा गया। मरीज का हार्ट गुजरात के अहमदाबाद, लीवर भोपाल और एक किडनी जबलपुर में ही जरूरतमंद मरीजों को ट्रांसप्लांट की जाएगी। इस महत्वपूर्ण कार्य के लिए मेडिकल अस्पताल से लेकर डुमना एयरपोर्ट तक ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया।
एक व्यक्ति के अंगों से तीन लोगों को मिलेगी जिंदगी
मरीज सत्येंद्र यादव का ब्रेन डेड हो गया था, मेडिकल डॉक्टरों ने मरीज के परिजनों से बात क और अंगदान के बारे में जानकारी दी जिसके बाद मरीज के परिजन तैयार हुए और अंगदान की प्रक्रिया पूरी की गई। मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. नवनीत सक्सेना ने बताया कि अंगदान करने वाले इस मरीज का हार्ट, लीवर और किडनी दान किया गया है। मरीज का दिल गुजरात के अहमदाबाद में एक जरूरतमंद मरीज के लिए भेजा गया है, जहाँ उसकी जान बचाई जा सकेगी। लीवर को भोपाल भेजा गया है, जहाँ के एक मरीज को यह नया जीवन देगा। एक किडनी जबलपुर में ही किसी जरूरतमंद मरीज को ट्रांसप्लांट की जाएगी, जबकि दूसरी किडनी को भी सुरक्षित रखा गया है।
इस अंगदान से यह साफ हो गया है कि एक व्यक्ति का निर्णय कई परिवारों के जीवन में खुशियाँ ला सकता है।
ग्रीन कॉरिडोर से कम समय में पहुँचे अंग
अंगों को समय पर उनके गंतव्य तक पहुँचाना एक बड़ी चुनौती होती है। इसके लिए, ट्रैफिक पुलिस और प्रशासन के सहयोग से मेडिकल अस्पताल से लेकर डुमना एयरपोर्ट तक ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया था। इस कॉरिडोर के जरिए एंबुलेंस को बिना किसी रुकावट के एयरपोर्ट तक पहुँचाया गया, ताकि अंगों को तुरंत फ्लाइट से भेजा जा सके। अंगदान की इस पहल से जबलपुर में जागरूकता बढ़ी है और यह साबित हुआ है कि अंगदान वास्तव में महादान है।
यह है रूट
सुबह 10 बजे ग्रीन कॉरिडोर बनाया जाएगा और लगभग 10:30 बजे मेडिकल से एंबुलेंस के माध्यम से ऑर्गन डुमना के लिए रवाना होंगे जो लगभग 11 के पहले एयरपोर्ट पहुंच जाएंगे जहां से उन्हें भोपाल और अहमदाबाद भेजा जाएगा। जिसके लिए एंबुलेंस मेडिकल कॉलेज से निकलकर बरगी हिल्स रामपुर का रूट लेंगे इसके बाद में सीएमएस होते हुए सिविल लाइन से डुमना पहुंचेंगे ट्रैफिक को देखते हुए शहर के अंदर के रूट को छोड़कर बाहर से रूट तैयार किया गया
विश्व प्रसिद्ध सर्जन करेंगे ऑपरेशन
अंगों को समय पर प्रत्यारोपित करना सबसे बड़ी चुनौती होती है। विशेषज्ञों के अनुसार, लीवर को शरीर से निकालने के 6 घंटे के भीतर ही दूसरे शरीर में प्रत्यारोपित करना आवश्यक होता है। इसी को ध्यान में रखते हुए मेदांता अस्पताल की टीम जबलपुर में लीवर निकालने की प्रक्रिया में सहयोग करने के लिए आई थी। इसके बाद, भोपाल के सिद्धांत हॉस्पिटल में विश्व के जाने-माने लीवर सर्जन डॉ. अरविंद सिंह सोइन इस जटिल सर्जरी को अंजाम देंगे। दिल्ली के मरीज कीर्तन व्यास का रजिस्ट्रेशन पहले से ही था, जिसके कारण उन्हें दिल्ली से भोपाल बुलाकर यह ऑपरेशन किया जा रहा है।
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