जबलपुर,  जबलपुर की सड़कें अब मौत के जाल में बदलती जा रही हैं। पिछले पांच सालों में सड़क दुर्घटनाओं के जो आंकड़े सामने आए हैं, वे बेहद भयावह और डराने वाले हैं। इन पांच सालों (2020-2024) में जिले में 3000 से अधिक लोगों ने अपनी जान गंवाई है, जबकि 20,000 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। ये आंकड़े शहर की यातायात व्यवस्था और प्रशासनिक लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। ओवर-स्पीडिंग, हेलमेट न पहनना और सड़कों पर मौजूद ब्लैक स्पॉट ही इन मौतों के सबसे बड़े गुनहगार बनकर उभरे हैं।


 

मौतों का दर्दनाक रिकॉर्ड: हर साल बढ़ रहा आंकड़ा

 

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जबलपुर में दुर्घटनाओं और मौतों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हुई है, जो एक खतरनाक प्रवृत्ति को दर्शाती है:

  • 2020: 3123 दुर्घटनाओं में 419 मौतें।

  • 2021: 3471 दुर्घटनाओं में 485 मौतें।

  • 2022: 3698 दुर्घटनाओं में 532 मौतें।

  • 2023: 3943 दुर्घटनाओं में 558 मौतें।

  • 2024: 3696 दुर्घटनाओं में 638 मौतें हुईं, जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है।

दुर्भाग्य से, 2025 के शुरुआती 6 महीनों में ही 368 मौतें हो चुकी हैं, जिससे यह अनुमान लगाया जा रहा है कि यह साल भी मौत के मामले में पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ सकता है।


 

जिम्मेदार कौन? ओवर-स्पीडिंग, हेलमेट और ब्लैक स्पॉट

 

सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ बताते हैं कि इन मौतों के पीछे कुछ प्रमुख कारण हैं, जिन पर प्रशासन का ध्यान नहीं है:

  • मौत की रफ्तार: पिछले पांच सालों में हुई कुल मौतों में से 36.9% दोपहिया वाहनों की ओवर-स्पीडिंग के कारण हुईं, जबकि 31% चार-पहिया वाहनों की तेज रफ्तार का परिणाम थीं।

  • हेलमेट की अनदेखी: 2020 से 2024 के बीच 619 दोपहिया वाहन चालकों की मौत सिर्फ इसलिए हुई क्योंकि उन्होंने हेलमेट नहीं पहना था। यह एक ऐसी लापरवाही है, जिस पर आसानी से अंकुश लगाया जा सकता है।

  • मौत के कुएं: ब्लैक स्पॉट: सड़कों की खराब इंजीनियरिंग और ब्लैक स्पॉट भी लगातार मौतों का कारण बन रहे हैं। 2022 से 2024 के बीच 202 लोगों की जान सिर्फ ब्लैक स्पॉट वाले इलाकों में गई है।

ब्लैक स्पॉट की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। 2020 में इनकी संख्या 16 थी, जो 2024 में बढ़कर 47 हो गई है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि ये ब्लैक स्पॉट इन विभागों की जिम्मेदारी में आते हैं: NHAI (16), MPRDC (10), PWD (9) और नगर निगम (7)


 

प्रशासन पर उठे सवाल: कब होगी जवाबदेही तय?

 

इन आंकड़ों ने सीधे तौर पर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ट्रैफिक पुलिस, लोक निर्माण विभाग, नगर निगम और अन्य एजेंसियों की लापरवाही साफ दिख रही है। शहर के एक वरिष्ठ यातायात विशेषज्ञ ने कहा, "यह सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि एक सिस्टम की नाकामी है। जब तक जिम्मेदार विभागों की जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक इन मौतों का सिलसिला नहीं रुकेगा। हमें सड़कों की इंजीनियरिंग सुधारनी होगी, कानून को सख्ती से लागू करना होगा और जनता को जागरूक करना होगा।"