आशंका:स्मार्ट मीटर पर पाकिस्तानी साइबर अटैक का खतरा,दिल्ली तक हड़कंप
एडवायजरी फर्म ने केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय को पत्र लिखकर जाहिर की चिंता,मप्र सरकार के अफसरों और बिजली कंपनियों के उच्च प्रबंधन में भी हलचल,बिलिंग के करोड़ों बचाने की कवायद तेज
विवेक उपाध्याय
जबलपुर। क्या ये मुम्किन है कि साइबर अटैक के माध्यम से हिन्दुस्तान के अलग-अलग इलाकों और मध्यप्रदेश में लगाए गये स्मार्ट मीटरों की बिलिंग को बढ़ाया जा रहा है ताकि इसका विरोध हो और अराजकता और असंतोष का माहौल बना रहे। प्रमाणिक तौर पर तो नहीं,लेकिन दिल्ली की सलाहकार फर्म स्मार्ट ग्रिड फोरम द्वारा केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय को लिखे पत्र ने ऐसी कई आशंकाओं को जन्म दे दिया है। अगर साइबर अटैक से बिलिंग को प्रभावित किया जा सकता है तो अटैकर्स के लिए उपभोक्ताओं द्वारा जमा की गयी बिल की राशि को उड़ाना भी बहुत मुश्किल काम नहीं होगा। फर्म द्वारा खत लिखे जाने की बात उजागर होने के बाद दिल्ली से लेकर भोपाल और जबलपुर तक बिजली मुख्यालयों में हड़कंप मचा हुआ है,लेकिन सब चुप हैं।
-ये है खत का मजमून
स्मार्ट ग्रिड फोरम ने ऊर्जा मंत्रालय को लिखा है कि सऊदी अरब की जिस कंपनी को स्मार्ट मीटर का काम दिया गया है,उस कंपनी के कई आला अधिकारी पाकिस्तानी हैं,जो साइबर अटैक के जरिए स्मार्ट मीटर के सिस्टम को अपने हिसाब से संचालित कर सकते हैं या मुम्किन है कि कर रहे हों। लैटर के अनुसार, सरकार को पॉवर सिस्टम को इस हमले से बचाने के लिए तत्परता से काम लेना चाहिए।
-खुफिया तंत्र हुआ एक्टिव
फर्म के इस सनसनीखेज पत्र के खुलासे के साथ ही खुफिया एजेंसियां भी सक्रिय हो चुकी हैं। सऊदी की जिस कंपनी को काम दिया गया है,उसकी पूरी कुंडली खंगाली जा रही है। एक्सपर्ट्स से स्मार्ट मीटरों की जांच-पड़ताल भी शुरु कराई गयी है ताकि वे साइबर अटैक की स्थिति का पता लगा सकें।
-करोड़ों का रेवेन्यु बचाने की फिक्र
खबर है कि इस पत्र के बाद दिल्ली से लेकर भोपाल तक अधिकारियों की सबसे बड़ी फिक्र यही है कि अटैकर्स यदि बिजली के बिलिंग सेक्शन तक पहुंच गए तो वे आसानी से करोड़ों रुपये न उड़ा लें। हालाकि, इस बारे में एक्सपर्ट्स को काम पर लगाया गया है,लेकिन अब तक विशेषज्ञ किसी नतीजे पर नहीं पहुंचे हैं। भोपाल के आला अधिकारी दिल्ली की टीम के साथ संपर्क में बने हुए हैं।
-जबलपुर में क्या है स्थिति
जबलपुर जिले में अब तक 9 लाख से ज्यादा स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हंै। यहां तक कि पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी स्मार्ट मीटर के प्री-पेड वर्जन का ट्रायल भी कामयाब तरीके से पूरा कर चुकी है। स्मार्ट मीटर को लेकर शुरुआती दौर से ही विरोध किया जाता रहा है। सबसे पहली आपत्ति इसकी बिलिंग को लेकर ही है। आरोप लगाए गये हैं कि ये मीटर पब्लिक से ज्यादा बिल वसूली कर रहे हैं।
-वर्जन
-गंभीरता से जांच कराई जाएगी
इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया गया है। पत्र में व्यक्त की गयीं आशंका व चेतावनी के मद्देनजर तत्परता से इसकी जांच कराई जाएगी। हम निविदा शर्तों का भी अवलोकन करेंगे। केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय से हम सतत संपर्क में हैं।
नीरज मंडलोई, अपर मुख्य सचिव, ऊर्जा विभाग, मप्र
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