जबलपुर: साइबर ठगी के एक मामले में गिरफ्तार जबलपुर का एक बदमाश आगरा के मेडिकल कॉलेज से पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया। यह घटना पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। बदमाश, जिसे 15 जुलाई को जेल भेजा गया था, अब उसकी तलाश में आगरा से लेकर जबलपुर तक पुलिस ने एक सुरक्षा कॉरिडोर बनाया है।

पेट दर्द का बहाना, गार्डों की लापरवाही

पुलिस ने बताया कि पाटन निवासी संकेत यादव को उत्तर प्रदेश की कांसगंज पुलिस ने साइबर ठगी के आरोप में गिरफ्तार किया था। जेल में पेट दर्द और उल्टी की शिकायत के बाद उसे आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था। उसकी निगरानी के लिए दो गार्डों, अजीत पांडे और जयंत कुमार को तैनात किया गया था।

पुलिस के मुताबिक, शनिवार-रविवार की दरमियानी रात 2 से 3 बजे के बीच, जब दोनों गार्ड सो रहे थे, तब संकेत यादव हथकड़ी निकालकर भाग गया। जब गार्डों की नींद खुली तो वह गायब था। सूचना मिलते ही पुलिस ने रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड पर तलाशी शुरू की, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं मिला।

पूरे रास्ते पर अलर्ट, संभावित ठिकानों पर दबिश

बदमाश के फरार होने के बाद पुलिस ने आगरा से जबलपुर तक उसके संभावित ठिकानों पर नजर रखी हुई है। प्रारंभिक पूछताछ के आधार पर पुलिस उसके दोस्तों और रिश्तेदारों के यहां दबिश दे रही है। डिप्टी जेलर रामदास यादव ने बताया कि संकेत यादव को इलाज के लिए आगरा ले जाया गया था। वह कासगंज जेल में बंद था।

एसपी की आवाज निकालकर की थी ठगी

पुलिस के मुताबिक, संकेत यादव ने आईपीएस अपर्णा कौशिक की आवाज और फोटो का इस्तेमाल कर एक कारोबारी से ठगी की थी। साइबर एक्सपर्ट की मदद से पुलिस ने उसकी लोकेशन का पता लगाया और उसे गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के दौरान उसके पास से 75 सिम कार्ड और चार्जर बरामद हुए थे। इस घटना ने एक बार फिर पुलिस सुरक्षा की गंभीरता पर सवाल खड़े किए हैं, जहां एक शातिर अपराधी आसानी से हिरासत से भागने में कामयाब हो गया।