विवेक उपाध्याय
जबलपुर। उज्जैन सिंहस्थ के आयोजन के लिए किसानों की साढ़े सात हजार एकड़ से ज्यादा कृषि भूमि का अधिग्रहण करने के मप्र सरकार के फैसले के खिलाफ भारतीय किसान संघ ने कड़ा एतराज जाहिर किया है। संघ के इस रुख के बाद सरकार ने संघ को राजी करने की तैयारी कर ली है। बताया गया है कि इस मामले में अभी तक सरकार ने संशोधन या सुधार को लेकर कोई बात नहीं की है। भारतीय किसान संघ के राष्ट्रीय महामंत्री मोहिनी मोहन मिश्र का मप्र सरकार को लिखा पत्र सोशल मीडिया में वायरल होने के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में सरगर्मी बढ़ गयी है। संघ ने राज्य सरकार के लैंड पुलिंग एक्ट का विरोध किया है,जिससे पूरे प्रदेश के किसानों पर विपरीत असर पड़ेगा। संघ ने कहा है कि यदि सरकार अपने फैसले पर अड़ी रही तो सरकार का विरोध खुलकर किया जाएगा।
-कुंभ की तर्ज पर हो सिंहस्थ:संघ
वायरल लैटर में संघ ने सरकार से कहा कि जिस तरह से कुंभ मेले के आयोजन में अस्थायी निर्माण किए गये थे, ठीक वैसे ही सिंहस्थ में भी किए जाएं। जमीन का अधिग्रहण अस्थीय तौर पर किया जाए ताकि किसान भविष्य में पुन: कृषि कार्य कर सकें। संघ ने सरकार से कहा कि वो इस बारे में किसानों से भी चर्चा करे ताकि उनकी मांगें और परेशानियां सामने आ सकें। पत्र में प्रश्न उठाया गया है कि आखिर मेला स्थल में स्थायी निर्माणों का भविष्य में रखरखाव कैसे किया जाएगा और उन निर्माणों का उपयोग क्या होगा। आगे कहा गया है कि जब इस भूमि पर निर्माण हो जाएंगे तो इस क्षेत्र की खेती भूमि पर भी विपरीत असर पड़ेगा। पत्र में सिंहस्थ में आने वाले श्रद्धालुओं की अनुमानित संख्या और उनके लिहाज से की जा रही व्यवस्थाओं पर भी सवालिया निशान लगाया गया है।
-सरकार ने शुरु की मनाने की कवायद
इधर, संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि श्री मिश्र के इस कड़े पत्र के बाद सरकार अब संघ को मनाने में जुटी है। जल्दी ही इस संबंध में संघ के पदाधिकारियों और सरकार के नुमाइंदों की एक बैठक भोपाल में होगी। इससे पहले राज्य सरकार के प्रतिनिधि दिल्ली जाकर संघ के पदाधिकारियों से मेल-मुलाकात कर चुके हैं, लेकिन उस बैठक में बात नहीं बनी।
-संघ के नजरिए पर एक नजर
संघ ने स्पष्ट किया है कि वे सरकारों के कामकाज में बाधा नहीं डालते,लेकिन जब किसानों के हित प्रभावित होंगे तो वे मुखर होकर विरोध करेंगे। जहां एक ओर भारतीय किसान संघ ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर केंद्र सरकार के
उस फैसले का स्वागत किया है,जिसमें सरकार ने किसानों के हित ेमें अमेरिकी बाजार को प्रवेश देने से इंकार कर दिया है,लेकिन मप्र सरकार के किसानों की जमीन अधिग्रहण करने के फैसले के खिलाफ संघ ने बिगुल फूंक दिया है।  
-संघ के सर्वे की रिपोर्ट में क्या है
भारतीय किसान संघ द्वारा भूमि अधिग्रहण  पर आधारित एक सर्वे भी कराया गया है, जिसमें देश भर के 43 प्रांतों के किसानों से 15 बिंदुओं  राय ली गई। इस सर्वे में किसानों ने भूमि अधिग्रहण को सिरे से नकारा है। इस सर्वे की रिपोर्ट केंद्र व राज्य सरकार भेज दी है। उल्लेखनीय है कि पंजाब में भी आम आदमी की राज्य सरकार लैंड पुलिंग एक्ट लेकर आयी थी,लेकिन किसानों के जबरदस्त विरोध के बाद सरकार को कदम पीछे खींचने पड़े।