बालाघाट : - वैसे तो बालाघाट जिला अपने घने जंगलों और वन्य प्राणियों के लिए जाना जाता है, पर इन दिनों कुछ लोग अपने वित्तीय, राजनैतिक और व्यक्तिगत फायदे के लिए वनों को विनाश की ओर ले जाने के लिये तत्पर है।

ताजा जानकारी वन परिक्षेत्र पूर्व बैहर सामान्य के मंडई क्षेत्र से प्राप्त हो रही है जहां इन दिनों फर्जी वन पट्टों का कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है। 
ग्राम चरचेंडी, जगला, छपला का है मामला
बीते दिनों कक्ष क्रमांक 1642 में वर्ष 2023 में वन विभाग द्वारा किए गए वृक्षारोपण में अचानक कुछ लोग आकर अपने पट्टे की जमीन बता कर वृक्षारोपण को नष्ट करने लगे। वन विभाग के अमले द्वारा इन्हें रोकने पर कुछ लोगों ने अपने पट्टे दिखाए। संदेह तब उत्पन्न हुआ जब वन अधिकार पत्र धारियों की सूची से इनके नाम का मिलान किया गया। किसी एक का भी नाम उस सूची में नहीं था। ऐसे में जब ए सी ट्राइबल से जानकारी मांगी गई तो उनके यहां भी इन व्यक्तियों को कभी भी पट्टा देने का या किसी भी प्रकार का कोई उल्लेख नहीं मिला। वन विभाग द्वारा पट्टों की पुष्टि पूरी न होने तक इन लोगों से आग्रह किया कि लाखों रुपए खर्च कर लगाए गए वृक्षारोपण को क्षति ना पहुंचाएं।

उसके बावजूद भी इसी फर्जी पट्टे के आधार पर माननीय उच्च न्यायालय में पट्टा धारियों ने रिट याचिका लगा दी। जो कि पहली ही पेशी में खारिज हो गई।

सूत्रों से यह भी ज्ञात हुआ है कि फर्जी पट्टों के इस रैकेट के पीछे कुछ जिम्मेदार लोगों का नाम भी वन विभाग को पता चला है। जिसमें शासकीय और अशासकीय दोनों प्रकार के लोग हैं। इस संबंध में पत्राचार भी किया जा चुका है। देखना ये है कि बालाघाट की अमूल्य संपत्ति को नष्ट करने करवाने वाले लोगों पर कब कार्यवाही होगी।
जहां एक तरफ शासन के नियम अनुसार लंबे समय से शासकीय जमीन पर कब्जा किए हुए लोगों को ढूंढ ढूंढ कर स्थाई पट्टा देने के लिए वन विभाग ,पंचायत विभाग, राजस्व एवं पुलिस विभाग के सहयोग से दावे करवा रहा है वही दूसरी ओर ऐसे लोग जिनका कभी वन भूमि पर कब्जा था ही नहीं था वो आकर फर्जी पट्टे बनवा ले रहे हैं।

फर्जी पट्टे के आधार पर अतिक्रमण की कोशिश

दिनांक 1,2,3 जुलाई 2025 को ऐसे ही फर्जी पट्टों के आधार पर वन भूमि पर अतिक्रमण किया जा रहा था। वन विभाग की टीम ने जब ग्राम चरचेंडी निवासी इन अतिक्रमण कर्ताओं को जब समझा बुझा कर रोकने का प्रयास किया तो अतिक्रमणकारी उल्टा वन विभाग की टीम पर ही हावी हो गए और पत्थर कुल्हाड़ी लेकर उनके पीछे दौड़ने लगे ।
 जिस पर दिनांक 3 जुलाई को परिक्षेत्र पूर्व और पश्चिम बैहर सामान्य के विशेष गठित दल ने अतिक्रमणकारियों को अभिरक्षा में लेकर वन अपराध प्रकरण पंजीबद्ध किया। जब अतिक्रमणकर्ताओं को यह समझ आया कि फर्जी पट्टे का भांडा फूटने वाला है तब मुद्दे से ध्यान भटकाने के उद्देश्य से करीब एक माह बाद पुलिस में जाकर शिकायत दर्ज करा दी कि वन विभाग ने उनके साथ मार पीट की है। मौका देख कुछ नेताओं और पत्रकारों ने भी इस बात का बतंगड़ बना दिया और सोशल मीडिया पर खबरें चलाने लगे। और पूरा मुद्दा फर्जी पट्टे से हट कर वन विभाग के अत्याचार पर शिफ्ट कर दिया गया।
जबकि वन विभाग से इस बात पर संपर्क करने पर उनके द्वारा बताया गया कि सभी लोगों पर नियमानुसार वन
अपराध प्रकरण दर्ज कर, स्वास्थ परीक्षण करवा कर मुचलके पर आरोपियों को छोड़ा गया है।