दतिया (म.प्र.)
जेल में सजा काट रहा हत्या का आरोपी कैदी विशाल जिला अस्पताल में 'वीआईपी ट्रीटमेंट' लेते रंगे हाथ पकड़ा गया। कैदी वार्ड खाली होने के बावजूद उसे वृद्धजनों के लिए बने एसी वार्ड में रखा गया, जहां न सिर्फ़ परिजनों को घंटों बैठने की छूट दी गई बल्कि कैदी खुलेआम मोबाइल चलाते और घर का खाना खाते नजर आया।


राजनीतिक रसूख का कमाल

अस्पताल सूत्रों के मुताबिक, कैदी के अस्पताल पहुंचते ही किसी राजनीतिक पार्टी के बड़े नेता का फोन आया, जिसके बाद व्यवस्थाएं पल भर में बदल गईं। कैदी को मिलने वाली सरकारी सुविधा अचानक “विशेष सुविधा” में बदल गई।


कैसे हुआ खुलासा

मामले की भनक लगते ही स्थानीय मीडिया मौके पर पहुंची। कैमरे में कैदी की वीआईपी मौज-मस्ती कैद होते ही अस्पताल प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए।

  • तुरंत कैदी को एसी वार्ड से कैदी वार्ड में शिफ्ट किया गया

  • मोबाइल और परिजनों की खुली एंट्री पर कोई जवाब नहीं मिला

  • अधिकारी कैमरे से बचते रहे, गोलमोल जवाब देते रहे


अस्पताल प्रबंधन की सफाई

अस्पताल प्रशासन ने सफाई देते हुए कहा —
"सभी वार्ड भरे थे, इसलिए कैदी को वृद्धजन वार्ड में रखा गया। अब जगह मिलने पर उसे कैदी वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया है।"
लेकिन मीडिया फुटेज और चश्मदीद गवाहों के बयान इस दावे को खोखला साबित कर रहे हैं।


जेल प्रशासन पर भी सवाल

  • कैदी के पास मोबाइल कैसे आया?

  • क्या परिजनों को घंटों मिलने की अनुमति नियमों के खिलाफ नहीं है?

  • क्या अस्पताल और जेल प्रशासन दोनों पर राजनीतिक दबाव था?

स्थानीय नागरिकों ने इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।


 तथ्य

  • आरोपी: विशाल (हत्या केस में सजा)

  • वार्ड: वृद्धजन एसी वार्ड, जबकि कैदी वार्ड खाली था

  • सुविधाएं: मोबाइल फोन, घर का खाना, परिजनों की फ्री एंट्री

  • घटना का असर: मीडिया पहुंची, तुरंत वार्ड बदला गया

  • प्रशासन का दावा: "वार्ड भरे थे" — सबूतों से मेल नहीं खाता