6 साल से चुनाव न लड़ने वाले दलों पर चुनाव आयोग की सख्ती, मध्यप्रदेश की 23 पार्टियों पर मंडराया रद्दीकरण का खतरा
भोपाल। देशभर में निष्क्रिय हो चुके राजनीतिक दलों के खिलाफ चुनाव आयोग की मुहिम तेज हो गई है। इसी कड़ी में मध्यप्रदेश की 23 पंजीकृत राजनीतिक पार्टियों पर भी कार्रवाई की तलवार लटक रही है। आयोग ने इन दलों को नोटिस जारी कर 15 दिन में जवाब देने को कहा है। यदि तय समय में संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो इनका पंजीकरण रद्द कर दिया जाएगा।
6 साल से नहीं लड़ा कोई चुनाव
चुनाव आयोग के अनुसार, मध्यप्रदेश की इन 23 पार्टियों ने पिछले 6 वर्षों से किसी भी विधानसभा, लोकसभा या स्थानीय निकाय चुनाव में हिस्सा नहीं लिया है। जनप्रतिनिधि अधिनियम 1951 के प्रावधानों के तहत कोई भी पंजीकृत राजनीतिक दल यदि 6 साल तक कोई चुनाव नहीं लड़ता है, तो उसका पंजीकरण रद्द किया जा सकता है।
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी को निर्देश
चुनाव आयोग ने राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी को निर्देश दिए हैं कि वे इन 23 दलों को नोटिस जारी करें और कारण पूछें कि उन्होंने इतने लंबे समय तक चुनावी प्रक्रिया में भाग क्यों नहीं लिया। नोटिस मिलने के बाद दलों के पास केवल 15 दिन का समय होगा, जिसमें उन्हें ठोस कारण प्रस्तुत करना होगा।
पहले भी 15 दलों का पंजीकरण रद्द
मध्यप्रदेश में कुल 111 पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल थे। इनमें से हाल ही में 15 दलों का पंजीकरण निरस्त किया जा चुका है। अब 23 और दल रद्दीकरण की प्रक्रिया के दायरे में हैं। यदि ये भी रद्द हो जाते हैं, तो राज्य में सक्रिय दलों की संख्या में और कमी आ जाएगी।
देश में 6 राष्ट्रीय और 67 क्षेत्रीय दल सक्रिय
वर्तमान में पूरे देश में 6 राष्ट्रीय राजनीतिक दल और 67 मान्यता प्राप्त क्षेत्रीय दल सक्रिय हैं। चुनाव आयोग के अनुसार, निष्क्रिय दलों के पंजीकरण रद्द करने की प्रक्रिया पूरे देश में चल रही है, ताकि केवल सक्रिय और जनप्रतिनिधित्व करने वाले दल ही पंजीकृत बने रहें।
चुनाव आयोग की मंशा
चुनाव आयोग का मानना है कि पंजीकृत लेकिन निष्क्रिय दल न केवल चुनावी प्रक्रिया में बाधा डालते हैं, बल्कि कई बार इनका इस्तेमाल गैर-राजनीतिक और अवैध गतिविधियों के लिए भी होता है। ऐसे में नियमों का पालन न करने वाले दलों पर कड़ी कार्रवाई की जा रही है।
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