जबलपुर मेडिकल अस्पताल में जापानी इंसेफेलाइटिस से मासूम की मौतः पाँच साल बाद लौटी दहशत
डिंडौरी के 6 वर्षीय अजय ने मेडिकल कॉलेज में तोड़ा दम, प्रदेश में हाई अलर्ट’’
जबलपुर। प्रदेश में पाँच साल बाद जापानी इंसेफेलाइटिस से मौत का मामला सामने आते ही स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन में हड़कंप मच गया है। नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज, जबलपुर में उपचाररत डिंडौरी जिले के ग्राम बहेरा निवासी छह वर्षीय अजय की मौत इस खतरनाक वायरस से होने की आशंका जताई जा रही है। वर्ष 2019 में भोपाल में इस बीमारी से हुई एक मौत के बाद से प्रदेश में कोई मामला दर्ज नहीं हुआ था। स्वास्थ्य विभाग का मानना था कि यह रोग नियंत्रण में है, लेकिन ताज़ा घटना ने फिर से खतरे की घंटी बजा दी है।
कैसे हुई घटना
स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त संचालक, जबलपुर, डॉ. संजय मिश्रा ने बताया कि अजय को 6 अगस्त को तेज बुखार, सिरदर्द और उलझन की स्थिति में मेडिकल कॉलेज अस्पताल लाया गया था। प्रारंभिक जांच में डॉक्टरों ने जापानी इंसेफेलाइटिस का संदेह जताया और तय प्रोटोकॉल के तहत 72 घंटे बाद दूसरी जांच की योजना बनाई। लेकिन इलाज के दौरान ही मासूम की हालत बिगड़ती चली गई और निर्धारित समय से पहले ही उसकी मौत हो गई। दूसरी जांच न हो पाने के कारण आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी, लेकिन लक्षण और जांच के शुरुआती परिणाम जापानी इंसेफेलाइटिस की ओर संकेत कर रहे हैं।
’क्या है जापानी इंसेफेलाइटिस’’
यह ’क्यूलेक्स’ प्रजाति के मच्छरों से फैलने वाला एक घातक वायरल रोग है। सुअर और कुछ जंगली पक्षी इसके वाहक होते हैं।वायरस संक्रमित मच्छर के काटने से शरीर में प्रवेश कर मस्तिष्क में सूजन पैदा करता है। हल्के मामलों में लक्षण नहीं दिखते, लेकिन गंभीर संक्रमण में तेज बुखार, सिरदर्द, दौरे, उलझन और कोमा तक हो सकता है। समय पर इलाज न मिलने पर यह जानलेवा साबित होता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह बीमारी अधिकतर धान के खेतों, गीले इलाकों और जलीय पौधों वाले क्षेत्रों में पनपने वाले मच्छरों से फैलती है।
’मौत के बाद सतर्क हुआ प्रशासन’’
मासूम की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग ने जबलपुर और डिंडौरी समेत आसपास के जिलों में हाई अलर्ट जारी कर दिया है। ग्रामीण क्षेत्रों में मच्छरों के प्रकोप की विशेष निगरानी के आदेश दिए गए हैं।
’ सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को संदिग्ध लक्षण वाले मरीजों की तुरंत पहचान और रिपोर्टिंग का निर्देश।’ धान के खेतों और जलजमाव वाले क्षेत्रों में लार्वा नाशक दवाओं का छिड़काव तेज।
’ लोगों को मच्छरदानी, पूरी बाजू के कपड़े और रिपेलेंट्स के इस्तेमाल के लिए जागरूक किया जा रहा है।
’2019 के बाद पहला मामला, चिंता में स्वास्थ्य विभाग’’
प्रदेश में जापानी इंसेफेलाइटिस के मामले भले ही कम हैं, लेकिन मृत्यु दर काफी अधिक है। 2019 में भोपाल में हुई मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग ने टीकाकरण और मच्छर नियंत्रण अभियान चलाए थे। विशेषज्ञों का कहना है कि यह बीमारी खत्म नहीं हुई है, बल्कि दबे रूप में मौजूद है और अनुकूल परिस्थितियों में फिर से फैल सकती है।
’बचाव के तरीके
घर और आसपास पानी जमा न होने दें।
धान के खेतों व गीले क्षेत्रों में नियमित दवा का छिड़काव करें।
. रात में मच्छरदानी का इस्तेमाल करें।
तेज बुखार, सिरदर्द या उलझन के लक्षण पर तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।
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