भोपाल। मध्य प्रदेश के देवास जिले में पुलिस हिरासत में दलित युवकों पर थर्ड डिग्री टॉर्चर के गंभीर आरोप ने पूरे प्रदेश में हलचल मचा दी है। घटना के बाद कांग्रेस ने मोर्चा संभालते हुए पुलिस प्रशासन पर सीधे निशाना साधा है और दोषी पुलिसकर्मियों को तत्काल सस्पेंड करने, हाई-लेवल जांच कराने तथा पीड़ितों को न्याय दिलाने की मांग की है।

’’कांग्रेस का आरोपकृष्गुंडागर्दी चरम पर
पूर्व केंद्रीय मंत्री ’’अरुण यादव’’ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व ट्विटर) पर एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें तीन दलित युवककृ’’रितेश, रवि और रितेश’’कृगंभीर चोटों से जख्मी नजर आ रहे हैं। उनके हाथ-पैर पर पट्टियां बंधी हैं और शरीर के कई हिस्सों पर चोट के गहरे निशान साफ दिखाई दे रहे हैं।

अरुण यादव ने अपने पोस्ट में लिखा
’मध्यप्रदेश पुलिस की गुंडागर्दी चरम पर। देवास के बावड़िया थाने में 3 निर्दाेष दलित युवकों को बेरहमी से पीटा गया। थर्ड डिग्री टॉर्चर कर उनके नाखून तक तोड़ दिए गए। जब कोई सबूत नहीं तो अमानवीय यातना क्यों? क्ळच् महोदय, तत्काल दोषी पुलिसकर्मियों को सस्पेंड करो, हाई-लेवल जांच बैठाओ और दलित बच्चों को न्याय दो। दलितों पर अत्याचार अब और बर्दाश्त नहीं होगा।ष्’

’’घटना से गरमाई सियासत’’
इस मामले ने प्रदेश की राजनीति में गरमी ला दी है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह घटना प्रदेश में दलित समुदाय के प्रति पुलिस के रवैये को उजागर करती है। पार्टी का आरोप है कि राज्य में दलित उत्पीड़न के मामलों में पुलिस प्रशासन की लापरवाही और अत्याचार बढ़ते जा रहे हैं।
कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि अगर आरोपियों पर तुरंत कार्रवाई नहीं हुई तो पार्टी सड़क पर उतरकर आंदोलन करेगी।

’’पुलिस की चुप्पी और जांच की मांग’’
पुलिस मुख्यालय की ओर से अभी तक इस मामले में कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। हालांकि सूत्रों के मुताबिक, क्ळच् ने इस घटना की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है और आंतरिक जांच की प्रक्रिया शुरू करने के संकेत दिए हैं।
मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने भी इस घटना की निंदा करते हुए कहा है कि हिरासत में किसी भी व्यक्ति के साथ ऐसा अमानवीय व्यवहार कानून और संविधान की मूल भावना के खिलाफ है। उन्होंने मांग की है कि आरोपियों के खिलाफ न केवल विभागीय, बल्कि आपराधिक कार्रवाई भी की जाए।

’’दलित समुदाय में आक्रोश’’
देवास और आसपास के इलाकों में दलित समुदाय में इस घटना को लेकर गहरा आक्रोश है। पीड़ित परिवारों का कहना है कि उनके बेटे निर्दाेष हैं और पुलिस ने जानबूझकर उन्हें प्रताड़ित किया। उनका आरोप है कि पुलिस ने बिना किसी ठोस सबूत के उन्हें थाने में बंद किया और बेरहमी से पीटा।

पृष्ठभूमि-थर्ड डिग्री टॉर्चर क्या है?’’
थर्ड डिग्री टॉर्चर पुलिस पूछताछ का वह गैरकानूनी तरीका है, जिसमें आरोपी से कबूलनामे के लिए शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना दी जाती है। इसमें पीटना, नाखून उखाड़ना, बिजली का करंट लगाना, नींद से वंचित करना और अन्य क्रूर तरीके शामिल हो सकते हैं। भारतीय कानून के तहत यह पूरी तरह प्रतिबंधित है और इसके लिए जिम्मेदार पुलिसकर्मियों को कड़ी सजा का प्रावधान है।