सुप्रीम कोर्ट से भी मिली थी राहत नहीं, फिर भी आदेशों की अवहेलना; गिरफ्तारी वारंट तक पहुंचा मामला

जबलपुर, 
मध्य प्रदेश में प्राथमिक शिक्षकों की पदस्थापना को लेकर जारी आदेशों पर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए डीपीआई कमिश्नर शिल्पा गुप्ता सहित प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा विभाग, प्रमुख सचिव ट्रायबल वेलफेयर, और सागर, सतना, सीधी, कटनी, गुना के जिला शिक्षा अधिकारियों से जवाब तलब किया है। अदालत ने इन आदेशों की संवैधानिकता पर सवाल उठाते हुए विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा है।

मामले की पृष्ठभूमि

प्राथमिक शिक्षकों की नियुक्ति में आरक्षण कानूनों की गलत व्याख्या कर जारी पदस्थापना आदेशों को विभिन्न याचिकाओं के माध्यम से हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। 23 अक्टूबर 2024 को हाईकोर्ट ने इन याचिकाओं को स्वीकार करते हुए स्पष्ट निर्देश दिया था कि आरक्षित वर्ग के योग्य अभ्यर्थियों को उनकी प्रथम वरीयता के अनुसार 20 दिन के भीतर डीपीआई के स्कूलों में पदस्थ किया जाए।

निर्धारित समय सीमा में आदेश का पालन न करने पर याचिकाकर्ताओं ने डीपीआई कमिश्नर शिल्पा गुप्ता के खिलाफ अवमानना याचिकाएं दायर कीं। हाईकोर्ट से नोटिस मिलने के बावजूद न तो उनका जवाब दाखिल किया गया और न ही आदेशों की अनुपालना रिपोर्ट। इससे नाराज होकर हाईकोर्ट ने मई 2025 में गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट की भी फटकार

गिरफ्तारी से बचने के लिए शिल्पा गुप्ता ने सुप्रीम कोर्ट में SLP (C) Diary No. 13542/2025 दायर की, जिसे 25 अप्रैल 2025 को प्रारंभिक सुनवाई में ही खारिज कर हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखा गया। इसके बावजूद आदेशों का पालन नहीं किया गया।

*नए आदेश पर विवाद

18 जून 2025 की अंतिम तिथि से पहले, डीपीआई कमिश्नर ने संबंधित जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देशित कर याचिकाकर्ताओं के नए पदस्थापना आदेश जारी कर दिए। इसमें ट्रायबल विभाग में दी गई 2 वर्ष से अधिक की सेवाओं को मान्यता नहीं दी गई और 90% वेतन पा रहे शिक्षकों को 70% वेतन पर डीपीआई स्कूलों में पदस्थ कर दिया गया। आरोप है कि यह आदेश बदले की भावना से जारी किए गए।

नई याचिका और कोर्ट की कार्रवाई

इस कार्रवाई के खिलाफ संध्या शुक्ला (सीधी), शुभम उरमलिया (कटनी), आरती सेन (मंडला), उमाकांत साहू (सागर) समेत कई याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट में W\.P. No. 24466/2025 दाखिल की। जस्टिस एम.एस. भट्टी की बेंच ने प्रारंभिक सुनवाई में प्रमुख सचिवों, डीपीआई कमिश्नर, ट्रायबल कमिश्नर, संबंधित जिला शिक्षा अधिकारियों और कर्मचारी चयन मंडल को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर और अधिवक्ता अभिलाषा सिंह लोधी ने पैरवी की।