जबलपुर। माँ नर्मदा की पावन लहरों और घाटों ने मंगलवार को एक बार फिर देशभक्ति का अद्वितीय नज़ारा देखा। ग्वारीघाट से तिलवारा घाट तक 10 किलोमीटर लंबी अखंड भारत तिरंगा यात्रा निकाली गई, जिसने न केवल जबलपुर बल्कि पूरे क्षेत्र में देशप्रेम की अलख जगा दी। इस ऐतिहासिक यात्रा को इस बार देश की एकता और अखंडता के सूत्र में बांधने तथा ऑपरेशन सिंदूर की सफलता को समर्पित किया गया।

सुबह से ही ग्वारीघाट पर माहौल उत्साह और जोश से भर चुका था। ढोल-नगाड़ों की थाप, भारत माता की जय और वंदे मातरम् के नारों के बीच तिरंगे की लहराती छटा हर किसी के दिल को छू रही थी। यात्रा की विशेषता यह रही कि इसमें 6 साल की मासूम बच्ची से लेकर 80 साल के बुजुर्ग तक ने पूरे जोश के साथ भाग लिया। यह दृश्य अपने आप में अद्वितीय था, जहां पीढ़ियां एक साथ तिरंगे की शान में कदमताल कर रही थीं।

सबसे रोमांचक और प्रेरणादायक पल तब आया जब तैराकों ने 10 किलोमीटर की दूरी माँ नर्मदा में तैरते हुए तय की, वह भी हाथों में तिरंगा झंडा थामे। पानी में तिरंगे का लहराना और किनारों पर खड़े लोगों का ‘भारत माता की जय’ के नारों से स्वागत करना, यह दृश्य हर किसी की आंखों में गर्व और भावनाओं का सैलाब ले आया।

यात्रा के मार्ग में जगह-जगह स्वागत द्वार बनाए गए थे। स्थानीय लोगों ने पुष्पवर्षा कर तिरंगा यात्रा का अभिनंदन किया। कई जगह सांस्कृतिक कार्यक्रम, देशभक्ति गीत और नृत्य प्रस्तुत किए गए। बच्चे, महिलाएं, युवक और वृद्ध—हर कोई तिरंगे के रंग में रंगा हुआ नज़र आया।

आयोजकों के मुताबिक, यह यात्रा लगातार 17 वर्षों से बिना किसी विराम के आयोजित हो रही है। हर साल इसमें भाग लेने वालों की संख्या में वृद्धि हो रही है और अब यह सिर्फ एक शहर की परंपरा नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश में एक मिसाल बन चुकी है। आयोजकों ने कहा कि तिरंगा यात्रा का उद्देश्य आने वाली पीढ़ियों में देश के प्रति प्रेम, त्याग और बलिदान की भावना को जाग्रत करना है।

इस अवसर पर कई सामाजिक संगठनों, स्कूली बच्चों, खेल संघों और तैराकी क्लबों ने भी सक्रिय रूप से भाग लिया। यात्रा का समापन तिलवारा घाट पर राष्ट्रगान के साथ हुआ, जहां सभी ने एक स्वर में संकल्प लिया—“एक भारत, अखंड भारत”