एमपी पावर ट्रांसमिशन भर्ती में ओबीसी को छूट न देने का मामला हाईकोर्ट पहुंचा
याचिकाकर्ता को भर्ती में शामिल करने का अंतरिम आदेश, कंपनी को शपथ पत्र दाखिल करने के निर्देश
जबलपुर। मध्य प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड द्वारा 24 जून 2025 को जारी नियमित पदों की सीधी भर्ती के विज्ञापन में ओबीसी वर्ग को शैक्षणिक योग्यता में किसी प्रकार की छूट न दिए जाने के मामले में हाईकोर्ट ने कंपनी से जवाब मांगा है। हाईकोर्ट ने कंपनी को एक सप्ताह में शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश देते हुए अगली सुनवाई 22 अगस्त 2025 को तय की है।
क्या है मामला
विज्ञापन में सहायक अभियंता के 42 पद, विधि अधिकारी का 1 पद, कनिष्ठ अभियंता के 114 पद, कनिष्ठ अभियंता (सिविल) के 10 पद, लाइन परिचारक के 20 पद, उप केंद्र परिचारक के 158 पद और सर्वेयर परिचारक के 8 पदों की सीधी भर्ती की घोषणा की गई थी। इसमें एससी, एसटी और ईडब्ल्यूएस वर्ग को न्यूनतम अंकों में 10% की छूट दी गई, जबकि ओबीसी वर्ग को अनारक्षित वर्ग के समान 65% अंक अनिवार्य रखे गए।
टीकमगढ़ निवासी **सौरभ सिंह लोधी** ने इसे संवैधानिक प्रावधानों के विरुद्ध बताते हुए आरपीएस लॉ एसोसिएट के माध्यम से **याचिका क्रमांक WP/31114/2025** हाईकोर्ट में दाखिल की। प्रारंभिक सुनवाई में हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को भर्ती प्रक्रिया में शामिल करने का अंतरिम आदेश पारित किया।
कंपनी का तर्क और याचिकाकर्ता का जवाब
आज 14 अगस्त को हुई सुनवाई में कंपनी की ओर से 28 अगस्त 2002 के राजपत्र का हवाला दिया गया, जिसमें केवल एससी और एसटी को छूट का उल्लेख है। इस पर याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता **रामेश्वर सिंह ठाकुर** ने कहा कि 1995 में सामान्य प्रशासन विभाग ने अधिसूचना जारी कर ओबीसी को भी एससी-एसटी के समान छूट प्रदान करने के निर्देश दिए हैं।
अधिवक्ता ने कंपनी के आचरण को **ओबीसी विरोधी** बताते हुए कहा कि जिस अधिकारी ने यह विज्ञापन कानून और आरक्षण नियमों के विपरीत जारी किया, वह व्यक्तिगत रूप से **आरक्षण अधिनियम की धारा 6(2)** के तहत आपराधिक कृत्य का जिम्मेदार है, जिसमें एक वर्ष की सजा का प्रावधान है। उन्होंने कोर्ट से कहा कि कंपनी शपथ पत्र देकर यह स्पष्ट करे कि ओबीसी को छूट न देने का कानूनी आधार क्या है और किस नियम के तहत ईडब्ल्यूएस को 10% छूट दी गई है।
हाईकोर्ट का निर्देश
वरिष्ठ अधिवक्ता के तर्कों को गंभीरता से लेते हुए न्यायमूर्ति **एम.एस. भट्टी** की खंडपीठ ने कंपनी को एक सप्ताह में शपथ पत्र दाखिल करने और संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। अगली सुनवाई 22 अगस्त 2025 को होगी।याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी वरिष्ठ अधिवक्ता **रामेश्वर सिंह ठाकुर**, **हितेंद्र गोहलानी** और **अभिलाषा सिंह लोधी** ने की।
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