जबलपुर। सेना में भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता और सुरक्षा को धता बताते हुए एक युवक ने फर्जी दस्तावेजों के सहारे ‘अग्निवीर’ योजना के तहत अपनी भर्ती करा ली। ट्रेनिंग के दौरान दस्तावेजों की गहन जांच में यह फर्जीवाड़ा उजागर हुआ, जिसके बाद युवक को तत्काल प्रभाव से सेना से बर्खास्त कर दिया गया। साथ ही, गोरखपुर थाने में उसके खिलाफ बुधवार को धोखाधड़ी एवं जालसाजी का मामला दर्ज कर लिया गया। सेना ने आरोपी के सभी असली और नकली दस्तावेज पुलिस के हवाले कर दिए हैं, जिनकी जांच अब पुलिस कर रही है।

ऐसे हुआ फर्जीवाड़ा

गोरखपुर पुलिस के अनुसार, उत्तर प्रदेश के दानापुर स्थित सेना भर्ती कार्यालय ने दिसंबर 2024 में ‘अग्निवीर’ भर्ती रैली आयोजित की थी। इस रैली में आरोपी **पप्पू कुमार साह** ने **आयुष्मान आशीष** नाम से दस्तावेज जमा किए। फर्जी नाम और पहचान के आधार पर उसका चयन हो गया और 30 अप्रैल 2025 को उसे ट्रेनिंग के लिए जबलपुर के **ग्रेनेडियर्स रेजीमेंटल सेंटर** भेजा गया।

1 मई से उसकी ट्रेनिंग शुरू हो गई और उसे एक विशेष बैच संख्या भी आवंटित की गई। सब कुछ सामान्य लग रहा था, लेकिन बैंक खाता खोलने की प्रक्रिया के दौरान सच्चाई सामने आ गई।

### **आधार कार्ड ने खोली पोल**

जब आधार कार्ड की जांच हुई, तो बड़ा खुलासा हुआ। सेना में भर्ती के समय दिए गए आधार कार्ड में उसका नाम **आयुष्मान आशीष** दर्ज था, लेकिन वास्तविक आधार कार्ड में नाम **पप्पू कुमार** पाया गया। इतना ही नहीं, आरोपी ने आधार कार्ड में पिता का नाम और जन्मतिथि भी बदल दी थी। यही फर्जी जानकारी उसने भर्ती प्रक्रिया में भी इस्तेमाल की थी।

सेना में मचा हड़कंप

फर्जीवाड़े की जानकारी मिलते ही रेजीमेंटल सेंटर ने मामले की सूचना सेना के विभिन्न मुख्यालयों और अन्य ट्रेनिंग सेंटरों को दी। आंतरिक जांच में आरोप पुख्ता पाए गए, जिसके बाद आरोपी को तुरंत सेना से बर्खास्त कर दिया गया।

*कानूनी शिकंजा कसना शुरू

मामले की गंभीरता को देखते हुए सेना ने गोरखपुर थाने में लिखित शिकायत दी। पुलिस ने धोखाधड़ी, जालसाजी और सरकारी दस्तावेज में हेरफेर के आरोपों में एफआईआर दर्ज कर ली है। अब आरोपी के फर्जी और असली सभी दस्तावेजों की बारीकी से जांच की जा रही है।

पुलिस का कहना है कि जांच के बाद यह भी पता लगाया जाएगा कि आरोपी ने दस्तावेजों में हेरफेर कैसे और किनकी मदद से की। वहीं, सेना ने भी इस तरह की धोखाधड़ी रोकने के लिए दस्तावेज सत्यापन प्रक्रिया को और सख्त करने के संकेत दिए हैं।