भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार ने कर्तव्य स्थल से अनुपस्थित रहने वाले राजस्व अधिकारियों और कर्मचारियों पर कड़ा रुख अपनाते हुए तत्काल अनुशासनात्मक कार्रवाई के आदेश जारी कर दिए हैं। सामान्य प्रशासन विभाग ने सभी संभागायुक्तों को निर्देशित किया है कि ऐसे अधिकारियों पर मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम 1966 के तहत कार्रवाई करते हुए पूरी रिपोर्ट शीघ्र भेजी जाए।

मंत्रि-परिषद के 3 जून 2025 के निर्णय के अनुसार, शासन ने राजस्व अधिकारियों के बीच न्यायिक एवं गैर-न्यायिक कार्यों का स्पष्ट विभाजन किया था ताकि शासन की योजनाओं का कार्यान्वयन सुचारू रूप से हो सके। लेकिन कुछ अधिकारी इस निर्णय का विरोध करते हुए कर्तव्य स्थल से अनुपस्थित हो गए। विभाग के अनुसार, यह कृत्य शासन की मंशा और नीतियों के खिलाफ है और अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है।

सामान्य प्रशासन विभाग के 22 नवंबर 2006 के स्थाई निर्देशों के अनुसार, शासकीय सेवकों द्वारा हड़ताल, धरना या सामूहिक अवकाश लेना मध्यप्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के तहत कदाचरण है। ऐसे मामलों में सक्षम प्राधिकारी द्वारा दोष-सिद्धि के आधार पर कार्रवाई अनिवार्य है।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि अनुपस्थित रहने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को किसी भी परिस्थिति में बख्शा नहीं जाएगा। विभाग ने यह भी चेतावनी दी है कि बिना अनुमति अनुपस्थिति को गंभीर अनुशासनहीनता माना जाएगा और संबंधित के सेवा रिकॉर्ड में इसका उल्लेख किया जाएगा।

इस आदेश के बाद राजस्व विभाग में खलबली मच गई है। संभागायुक्तों को निर्देशित किया गया है कि वे अपने-अपने जिलों में पदस्थ सभी अनुपस्थित अधिकारियों की सूची तैयार करें, दोष-सिद्धि के आधार पर कार्रवाई करें और रिपोर्ट जल्द से जल्द भेजें। बताया जा रहा है कि इस सख्ती के चलते कई अधिकारी अब तत्काल ड्यूटी पर लौटने की तैयारी में हैं।