भोपाल।
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के स्पष्ट आदेश के बावजूद स्कूल शिक्षा विभाग एक बार फिर उन्हीं शिक्षकों को परेशान कर रहा है, जिनके पक्ष में अदालत ने फैसला सुनाया था। मामला बी.ए.सी. (ब्लॉक अकादमिक कोऑर्डिनेटर) और सी.ए.सी. (क्लस्टर अकादमिक कोऑर्डिनेटर) पदों पर प्रतिनियुक्ति पर भेजे गए शिक्षकों का है, जिन्हें समय से पहले ही वापसी का फरमान सुनाया गया था।

हाईकोर्ट ने पहले ही माना था कि स्कूल शिक्षा विभाग का यह आदेश नियमों के विपरीत है और प्रतिनियुक्ति अवधि पूरी होने से पहले शिक्षकों को हटाना गलत है। अदालत ने विभाग का आदेश रद्द करते हुए कहा था कि इन शिक्षकों पर कूलिंग पीरियड लागू नहीं होता। फैसले के बाद 22 अप्रैल 2025 को सभी शिक्षकों को पुनः प्रतिनियुक्ति पर भेज दिया गया।

लेकिन, दो महीने बाद ही विभाग ने फिर से प्रतिनियुक्ति आदेश रद्द कर शिक्षकों की मूल विभाग में वापसी का आदेश जारी कर दिया। इससे आक्रोशित होकर शिक्षक एक बार फिर हाईकोर्ट की शरण में पहुंचे।

हाईकोर्ट ने शिक्षकों की ओर से अधिवक्ता प्रवीण वर्मा और डॉ. ज्योति प्रवीण की दलीलें सुनने के बाद विभागीय आदेश पर स्थगन दे दिया और अगली सुनवाई के लिए नई तारीख तय की है।

शिक्षकों का आरोप है कि स्कूल शिक्षा विभाग अदालती आदेश का माखौल बना रहा है और बार-बार मनमानी कर उन्हें मानसिक रूप से परेशान कर रहा है। वहीं, विभाग इस पर कोई स्पष्ट जवाब देने से बच रहा है।

इस पूरे मामले ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं और यह एक बार फिर साबित कर रहा है कि प्रशासनिक मनमानी को रोकने के लिए न्यायालय के हस्तक्षेप की आवश्यकता बनी हुई है।