सरकारी आवास की स्थिति: दुनिया के सबसे आलीशान फ्लैटों में रहते हैं भारतीय सांसद
नई दिल्ली। देश की सेवा में पसीना बहाने वाले हमारे माननीय सांसद दुनिया के तमाम देशों के सांसदों से भी ज्यादा आलीशान जिंदगी जी रहे हैं। भारत में हाल ही में सांसदों के लिए लुटियंस जोन में 5 बेडरूम और कुल दस कमरों वाले शानदार फ्लैट तैयार किए गए हैं, जो एसी और सभी आधुनिक सुविधाओं से लैस हैं। 5000 स्क्वेयर फुट क्षेत्र में बने इन फ्लैटों में किचन, कई टॉयलेट और सुसज्जित फर्नीचर शामिल है। सुविधाओं और आकार के लिहाज से यह व्यवस्था दुनिया में कहीं और नहीं मिलती। इसके उलट कई देशों में सांसदों को छोटे घर, डॉरमीटरी जैसे आवास या सिर्फ आवास भत्ता मिलता है।
अमेरिका में भी सांसदों को सरकारी मकान नहीं दिए जाते, बल्कि भत्ता मिलता है, जिससे वे किराए पर घर या होटल ले सकते हैं। ब्रिटेन में स्थायी सरकारी आवास नहीं है, बल्कि “अकोमोडेशन बजट” के तहत लंदन में रहने के लिए किराया, होटल बिल और यूटिलिटी खर्च दिया जाता है। कुछ विशेष परिस्थितियों में छोटे 1-2 बेडरूम के फ्लैट उपलब्ध होते हैं, जिनका आकार 350-500 वर्ग फुट होता है। यूरोप के कई देशों में भी स्थिति अलग-अलग है। स्वीडन में अगर सांसद का घर स्टॉकहोम से बाहर है तो उसे दूसरा घर मुफ्त मिलता है, या किराया भत्ता दिया जाता है। पोलैंड में संसद भवन के पास होटल जैसे आवास उपलब्ध कराए जाते हैं, और जगह कम होने पर निजी अपार्टमेंट किराए पर लेने के लिए बजट दिया जाता है। इस तुलना में भारत के सांसदों को मिलने वाले विशाल, सुविधायुक्त और आलीशान फ्लैट न केवल आकार में सबसे बड़े हैं बल्कि सुविधाओं में भी सबसे आगे हैं, जो उन्हें दुनिया के अन्य देशों के नेताओं से अलग पहचान देते हैं। पाकिस्तान में सांसदों को इस्लामाबाद में दो बेडरूम वाले फैमिली सुइट मिलते हैं, जिनमें ड्राइंग रूम, किचन, फर्नीचर और बुनियादी सुविधाएं होती हैं। इनका आकार 1,600 से 4,000 वर्ग फुट तक होता है और मामूली किराया लिया जाता है। नेपाल में सरकारी आवास की जगह मासिक किराया और घर मरम्मत भत्ता दिया जाता है।
जापान के किराया भरते हैं सांसद
जापान में सांसदों को टोक्यो के अकासाका इलाके में 28 मंजिला कॉम्प्लेक्स में 82 वर्ग मीटर (लगभग 882 वर्ग फुट) के फ्लैट दिए जाते हैं, जिनमें तीन कमरे और किचन होते हैं। किराया सांसद खुद देते हैं, जो हाल ही में 92,000 येन से बढ़ाकर 124,652 येन हुआ है। दक्षिण कोरिया और चीन में सांसदों को कोई सरकारी आवास नहीं दिया जाता, बल्कि उन्हें खुद ही व्यवस्था करनी होती है, हालांकि भत्ता मिलता है। चीन में सांसद अधिकतर अपने गृह प्रांतों में रहते हैं और संसद सत्र के समय ही बीजिंग आते हैं।
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