जबलपुर:

जबलपुर शहर के घमापुर क्षेत्र में स्थित Db क्लब GCF ग्राउंड में चल रहे मेले में बिजली चोरी का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने पुलिस, बिजली विभाग और मेला ठेकेदार के बीच सांठगांठ को उजागर कर दिया है। आरोप है कि मात्र 1.5 लाख रुपए में मेले का ठेका लेने वाला ठेकेदार लाखों रुपए की बिजली सीधे तार जोड़कर चुरा रहा है, जिससे न सिर्फ सरकारी खजाने को चूना लग रहा है, बल्कि मेले में आए हजारों लोगों की जान भी खतरे में पड़ गई है।


 

क्या है पूरा मामला?

 

शहर के जाने-माने Db क्लब GCF मैदान में एक बड़े मेले का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें मनोरंजन के झूले, खाने-पीने के स्टॉल और अन्य दुकानें लगाई गई हैं। इस मेले को संचालित करने का ठेका 1.5 लाख रुपए में दिया गया था। मेले में भारी मात्रा में बिजली की खपत होती है, जिसके लिए नियमानुसार बिजली विभाग से अस्थायी व्यावसायिक कनेक्शन लेना अनिवार्य होता है।

लेकिन सूत्रों की मानें तो, ठेकेदार ने इस नियम का पालन करने के बजाय, घमापुर थाने के कुछ पुलिस अधिकारियों और बिजली विभाग के कर्मचारियों के साथ मिलकर एक गुप्त समझौता कर लिया। इस समझौते के तहत, ठेकेदार ने मीटर लगाकर बिजली लेने के बजाय, मुख्य बिजली लाइन से सीधे तौर पर "हुकिंग" करके बिजली चोरी करना शुरू कर दिया। इस चोरी की गई बिजली का उपयोग मेले के सभी झूलों, स्टॉलों की लाइटिंग और अन्य उपकरणों को चलाने के लिए किया जा रहा है।


 

राजस्व का नुकसान और जनता की जान से खिलवाड़

 

यह मामला सिर्फ बिजली चोरी तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इससे कई गंभीर समस्याएं पैदा हो रही हैं।

1. लाखों का राजस्व नुकसान: बिजली विभाग को प्रतिदिन हजारों रुपए का चूना लग रहा है। एक अनुमान के मुताबिक, जिस पैमाने पर बिजली का उपयोग हो रहा है, उस हिसाब से चोरी की गई बिजली का मूल्य लाखों रुपए में है। यह सरकारी खजाने को सीधा नुकसान है, जिसका असर अंततः आम जनता पर ही पड़ता है।

2. लोगों की जान को खतरा: सबसे बड़ी चिंता का विषय सुरक्षा है। मेले में, खासकर बच्चों और बुजुर्गों की भारी भीड़ होती है। डायरेक्ट हुकिंग के कारण बिजली के तार असुरक्षित और खुले में पड़े हैं। बारिश या किसी भी छोटी सी तकनीकी खराबी से शॉर्ट सर्किट, आग लगने या करंट लगने जैसी बड़ी दुर्घटना हो सकती है। एक छोटी सी चूक भी किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। यह कृत्य सीधे तौर पर हजारों लोगों की जान से खिलवाड़ है।


 

अधिकारियों की चुप्पी पर उठते सवाल

 

जब इस मामले में घमापुर पुलिस स्टेशन और बिजली विभाग के अधिकारियों से संपर्क साधा गया, तो उन्होंने चुप्पी साध ली। किसी भी अधिकारी ने इस पर कोई भी टिप्पणी देने से साफ इनकार कर दिया। अधिकारियों की यह चुप्पी इस बात को और पुख्ता करती है कि वे इस अवैध कार्य में शामिल हैं।सामाजिक कार्यकर्ता अनिल गुप्ता ने इस घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "यह बेहद शर्मनाक है कि जिन विभागों पर कानून और व्यवस्था बनाए रखने और जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी है, वही भ्रष्टाचार और अवैध कामों में लिप्त हैं। यह दिखाता है कि जबलपुर में कैसे सांठगांठ का सिंडिकेट काम कर रहा है।"


 

अब आगे क्या?

इस मामले ने प्रशासन पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह होगा कि क्या केवल ठेकेदार पर ही कार्रवाई होगी या इस साठगांठ में शामिल पुलिस और बिजली विभाग के भ्रष्ट अधिकारियों पर भी गाज गिरेगी। जबलपुर के नागरिकों ने इस मामले में मुख्यमंत्री और ऊर्जा मंत्री से हस्तक्षेप करने और दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई करने की अपील की है ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके। यह घटना एक चेतावनी है कि अगर भ्रष्टाचार पर लगाम नहीं लगाई गई तो यह जनता की सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बन सकता है।