जबलपुर। मध्य प्रदेश के चिकित्सा इतिहास में एक युगांतकारी उपलब्धि दर्ज करते हुए शासकीय नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज ने एक बड़ा कीर्तिमान स्थापित किया है। यहाँ पहली बार किसी शासकीय चिकित्सा संस्थान में सफल कैडेवरिक (मृत्यु उपरांत) किडनी प्रत्यारोपण किया गया है। यह ऐतिहासिक सफलता न केवल जबलपुर, बल्कि पूरे प्रदेश के स्वास्थ्य क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत का प्रतीक है।

 

यह जीवनदायी प्रत्यारोपण एक 42 वर्षीय मरीज पर किया गया, जिन्हें ब्रेन डेड घोषित किए गए अंगदाता श्री सत्येंद्र यादव द्वारा दान की गई किडनी से नया जीवन मिला। प्रत्यारोपण के बाद मरीज पूरी तरह से स्वस्थ होकर अस्पताल से डिस्चार्ज हो चुके हैं।

मेडिकल कॉलेज के अधिष्ठाता डॉ. नवनीत सक्सेना, डायरेक्टर सुपरस्पेशलिटी अस्पताल डॉ. अवधेश प्रताप कुशवाहा, अधीक्षक मेडिकल चिकित्सालय डॉ. अरविंद शर्मा और अधीक्षक सुपरस्पेशलिटी अस्पताल डॉ. जितेंद्र गुप्ता ने इस अभूतपूर्व सफलता पर पूरी ट्रांसप्लांट टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि प्रदेश में अंगदान और अंग प्रत्यारोपण की संस्कृति को बढ़ावा देने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगी।

 

एक अंगदाता ने दी कई जिंदगियों को नई शुरुआत

 

इस जटिल और बहु-संस्थानिक प्रक्रिया को सफल बनाने में नोडल अधिकारी डॉ. फणींद्र सोलंकी ने अहम भूमिका निभाई। उनके कुशल समन्वय से न केवल किडनी का प्रत्यारोपण जबलपुर में हुआ, बल्कि इसी मृतक दाता के हृदय को अहमदाबाद तथा लिवर को भोपाल स्थित संस्थानों में सफलतापूर्वक प्रत्यारोपित किया गया। इस तरह एक ही व्यक्ति के अंगदान से कई जिंदगियों को बचाया जा सका, जो अंगदान की महत्ता को दर्शाता है।

 

सामूहिक प्रयास से मिली ऐतिहासिक सफलता

 

किडनी प्रत्यारोपण सर्जरी को अंजाम देने वाली टीम में डॉ. नीरज जैन, डॉ. तुषार ढकाते और डॉ. रत्नेश का योगदान सराहनीय रहा। इस महान कार्य की शुरुआत परिजनों को अंगदान के लिए प्रेरित करने से हुई, जिसमें डॉ. जितिन बजाज और डॉ. शैलेंद्र रात्रे का विशेष योगदान रहा।

ब्रेन डेड डिक्लेरेशन कमेटी में डॉ. ललित जैन और डॉ. नम्रता चौहान ने महत्वपूर्ण सहयोग दिया। इसके अतिरिक्त, सर्जिकल टीम में डॉ. निमिष राय, डॉ. अविनाश, डॉ. अनुराग, डॉ. प्रवीण, डॉ. अरविंद; एनेस्थीसिया विभाग से डॉ. अमित जैन, डॉ. कमलराज, डॉ. प्रद्युम्न; तथा डॉ. रीति सेठ और डॉ. विवेक श्रीवास्तव का भी महत्वपूर्ण सहयोग रहा।

पूरी प्रक्रिया को सफल बनाने में मेडिकल कॉलेज के नर्सिंग स्टाफ, ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर और पीजी स्टाफ का भी योगदान अनुकरणीय रहा।

यह सफल प्रत्यारोपण न केवल जबलपुर मेडिकल कॉलेज के लिए एक गौरव का विषय है, बल्कि यह एक सशक्त सामाजिक संदेश भी देता है कि मृत्यु किसी के जीवन का अंत नहीं है, बल्कि किसी और की जिंदगी की एक नई शुरुआत भी बन सकती है।