जबलपुर।
कैंसर और एचपीवी संक्रमण जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के उन्मूलन हेतु सरकार की पहल को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से आईएमए जबलपुर ने जेओजीएस (जबलपुर ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजिकल सोसाइटी) और एफओजीएसआई (फेडरेशन ऑफ ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजिकल सोसाइटीज़ ऑफ इंडिया) के सहयोग से एक महत्वपूर्ण प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया। यह आयोजन एनएससीबी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (MCH) के नए शैक्षणिक ब्लॉक में हुआ, जिसमें मेडिकल के यूजी, पीजी एवं नर्सिंग छात्रों ने भाग लिया।

डॉ. अनुराधा डांग ने बताया एचपीवी वैक्सीन का महत्व

कार्यक्रम की मुख्य वक्ता राष्ट्रीय प्रशिक्षक डॉ. अनुराधा डांग रहीं। उन्होंने विस्तार से बताया कि—

  • एचपीवी टीकाकरण महिलाओं में 9 से 14 वर्ष और पुरुषों में 9 से 26 वर्ष की आयु तक सबसे प्रभावी होता है।

  • यह वैक्सीन पुरुषों और महिलाओं दोनों को एचपीवी संक्रमण से बचाती है, जो भविष्य में गर्भाशय ग्रीवा कैंसर, गले और अन्य कैंसर का कारण बन सकता है।

  • उन्होंने कहा, “कैंसर आज दुनिया के लिए सबसे बड़ा खतरा है। यदि हम समय रहते टीकाकरण पर जोर दें, तो कैंसर के मामलों में भारी कमी लाना संभव है।”

विशेषज्ञों की सक्रिय भागीदारी

प्रशिक्षण सत्र में डॉ. राखी बाजपेयी (अध्यक्ष जेओजीएस), डॉ. कोमल जैन (सचिव जेओजीएस), डॉ. कावेरी शॉ (सचिव आईएमए WDW), डॉ. दीप्ति गुप्ता और अन्य संकाय सदस्य मौजूद रहे। सभी ने छात्रों को टीकाकरण की तकनीकी और सामाजिक उपयोगिता पर जानकारी दी।

छात्रों ने अनुभव साझा किए

प्रशिक्षण में शामिल मेडिकल छात्रों ने इसे बेहद उपयोगी बताया।

  • एक नर्सिंग छात्रा ने कहा, “हमें अब समझ आया कि कैंसर रोकथाम का सबसे सरल तरीका समय पर एचपीवी टीकाकरण है। यह जानकारी आम जनता तक पहुँचाना हमारी जिम्मेदारी है।”

  • वहीं एक पीजी छात्र ने कहा, “यह सत्र हमारे क्लिनिकल नॉलेज को ही नहीं बढ़ाता, बल्कि समाज में जागरूकता फैलाने की प्रेरणा भी देता है।”

प्रशासन का मार्गदर्शन

यह आयोजन डीन डॉ. नवनीत सक्सेना और संयुक्त निदेशक एवं अधीक्षक डॉ. अरविंद शर्मा के मार्गदर्शन में सम्पन्न हुआ। उन्होंने कहा कि मेडिकल छात्रों को ऐसी जानकारी देना आवश्यक है ताकि वे आगे चलकर समाज में स्वास्थ्य जागरूकता के वाहक बन सकें।