जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पूर्व मंत्री गौरी शंकर बिसेन के खिलाफ फर्जी जाति प्रमाण पत्र की शिकायत की जांच न होने के मामले को गंभीरता से लिया है। हाईकोर्ट ने इस संबंध में दायर की गई अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य शासन, उच्च स्तरीय जाति जांच समिति, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के आयुक्त और गौरी शंकर बिसेन सहित अन्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।जस्टिस डी.डी. बंसल की एकलपीठ ने यह आदेश बालाघाट के पूर्व विधायक किशोर समरीते की ओर से दायर अवमानना याचिका पर दिया।

 

क्या है पूरा मामला?

 

याचिकाकर्ता किशोर समरीते ने कोर्ट को बताया कि उन्होंने वर्ष 2020 में भी हाईकोर्ट में एक याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि पूर्व मंत्री गौरी शंकर बिसेन का जाति प्रमाण पत्र फर्जी है और इसकी जांच होनी चाहिए। इस पर हाईकोर्ट ने 20 नवंबर 2023 को याचिकाकर्ता को निर्देश दिया था कि वह अपनी शिकायत को भोपाल स्थित उच्च स्तरीय जाति जांच समिति के समक्ष प्रस्तुत करें। कोर्ट ने समिति को यह भी आदेश दिया था कि वह तीन माह के भीतर इस शिकायत पर जांच पूरी कर निर्णय ले।

 

आदेश के बावजूद नहीं हुई कार्रवाई

 

किशोर समरीते ने कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए समिति के समक्ष शिकायत दर्ज करा दी थी। लेकिन, याचिका में आरोप लगाया गया है कि हाईकोर्ट के आदेश के दो वर्ष से अधिक का समय गुजर जाने के बावजूद भी समिति ने उनकी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की है। इसी कारण उन्हें कोर्ट की अवमानना याचिका दायर करनी पड़ी।सुनवाई के दौरान, याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता शिवेंद्र पांडेय और अभिमन्यु चौहान ने पक्ष रखा। अब हाईकोर्ट ने सभी अनावेदकों को नोटिस जारी कर यह स्पष्ट करने को कहा है कि कोर्ट के आदेश का पालन क्यों नहीं किया गया।