जबलपुर। मध्य प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर कांग्रेस हाईकमान पूरी तरह से सक्रिय हो गया है। इसी कड़ी में दिल्ली में एक ऐतिहासिक और निर्णायक बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें प्रदेश के सभी 52 जिलों के कांग्रेस अध्यक्षों को बुलाया गया। इस बैठक में पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी भी विशेष रूप से मौजूद रहे। उन्होंने अपनी बिहार यात्रा को बीच में रोककर इस बैठक में भाग लिया, जो यह दर्शाता है कि कांग्रेस हाईकमान ने अब मध्य प्रदेश को गंभीरता से लिया है।

बैठक का मुख्य उद्देश्य संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करना और सभी नेताओं व कार्यकर्ताओं को "मिशन 2025" के लिए एकजूट करना था।

जिला अध्यक्षों को मिला "वोट चोर, गद्दी छोड़" का टारगेट
इस बैठक में जिला अध्यक्षों को सिर्फ दिशा-निर्देश नहीं दिए गए, बल्कि उन्हें स्पष्ट और समयबद्ध अल्टीमेटम भी दिया गया।

वोटर लिस्ट की जिम्मेदारी: जिला अध्यक्षों को सबसे पहला और महत्वपूर्ण टास्क यह दिया गया है कि वे अपने-अपने जिले की मतदाता सूची का बारीकी से निरीक्षण करें। उन्हें फर्जी और गलत नामों को खोजकर उसकी रिपोर्ट दिल्ली मुख्यालय को सौंपनी होगी। यह माना जा रहा है कि पार्टी इस बार चुनाव आयोग के साथ भी इस मुद्दे को उठाएगी।

पंचायत स्तर तक संगठन: पार्टी ने अगले एक महीने का समय देते हुए यह निर्देश दिया है कि हर जिले में पंचायत स्तर तक कमेटियों का गठन किया जाए। यह ग्रामीण क्षेत्रों में पार्टी की पैठ मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा है।

नियमित आंदोलन: पार्टी नेताओं को हर महीने एक बड़ा आंदोलन या प्रेस कॉन्फ्रेंस करने का निर्देश दिया गया है। इसका उद्देश्य जनता के मुद्दों को उठाना और सरकार को घेरना है।

प्रदर्शन का आकलन: सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि पार्टी हाईकमान ने यह साफ कर दिया है कि जिला अध्यक्षों के कामकाज का हर 3 महीने में मूल्यांकन होगा। जो जिला अध्यक्ष अपेक्षा के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर पाएंगे, उन्हें पद से हटाया भी जा सकता है।

विशेष ट्रेनिंग: सभी जिला अध्यक्षों को 10 दिन की विशेष ट्रेनिंग दी जाएगी, जिसमें उन्हें चुनाव प्रबंधन, जनसंपर्क और संगठन को मजबूत करने के आधुनिक गुर सिखाए जाएंगे।

राहुल गांधी का सीधा संदेश: "व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं को छोड़ें"
राहुल गांधी ने बैठक में अपने संबोधन के दौरान नेताओं को स्पष्ट और सख्त लहजे में संदेश दिया। उन्होंने कहा कि "आप सभी चुनाव की रीढ़ हैं। अगर संगठन मजबूत होगा, तो जीत पक्की होगी।" उन्होंने सभी नेताओं से अपनी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं को छोड़कर एकजुट होकर काम करने की अपील की। राहुल ने साफ कहा कि अब सिर्फ नारेबाजी से काम नहीं चलेगा, बल्कि ठोस और जमीनी स्तर पर काम करके दिखाना होगा।

बैठक में यह भी तय किया गया कि 31 अगस्त को रतलाम में "वोट चोर, गद्दी छोड़" आंदोलन की शुरुआत की जाएगी, जिसमें प्रदेश के सभी बड़े नेता और कार्यकर्ता शामिल होंगे। पार्टी हाईकमान ने यह भी साफ किया है कि जिला अध्यक्षों के कामकाज पर अब एआईसीसी (All India Congress Committee) की सीधी नजर होगी और हर जिले की रिपोर्ट दिल्ली भेजी जाएगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बैठक मप्र कांग्रेस के लिए गेम चेंजर साबित हो सकती है, क्योंकि यह पहली बार है जब जिला स्तर के नेताओं को इतने बड़े और स्पष्ट टारगेट दिए गए हैं।