जबलपुर। नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज अस्पताल में रविवार को बड़ी लापरवाही का मामला सामने आया। यहां परिजनों को गलत नवजात शिशु का शव सौंप दिया गया। मामला सामने आने पर परिवारजन भड़क उठे और अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ जमकर हंगामा किया। समाजसेवी आशीष ठाकुर की तत्परता से इस पूरे घटनाक्रम का खुलासा हुआ, जिसके बाद मेडिकल प्रशासन सवालों के घेरे में आ गया है।

 क्या है पूरा मामला

मझौली थाना क्षेत्र के पटोरी गांव निवासी **धर्मेंद्र बर्मन (40)** ने 23 अगस्त को अपनी पत्नी **सुनीता (30)** को डिलीवरी के लिए मेडिकल अस्पताल में भर्ती कराया था। प्रसव के बाद बच्चा गंभीर हालत में था, जिसे **NICU (नवजात गहन चिकित्सा इकाई)** में रखा गया। परिजन लगातार बच्चे की देखभाल कर रहे थे।

25 अगस्त की सुबह अस्पताल ने बच्चे को मृत घोषित कर दिया और शव परिजनों को सौंप दिया। परिजन जब अंतिम संस्कार के लिए **तिलवारा घाट** पहुंचे, तो उन्हें पता चला कि अस्पताल ने लड़की की जगह लड़के का शव दे दिया है।

समाजसेवी की तत्परता से खुला मामला

धर्मेंद्र बर्मन ने इस गड़बड़ी की जानकारी घाट पर मौजूद लोगों को दी। मौके पर मौजूद समाजसेवी **आशीष ठाकुर** को इसकी सूचना दी गई। उन्होंने तुरंत परिवार को अस्पताल वापस लाकर पूरा मामला उजागर किया।

अस्पताल प्रबंधन पर उठे सवाल

परिजनों के अस्पताल लौटने के बाद शुरुआत में संबंधित विभाग ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। लेकिन जब बात **अस्पताल अधीक्षक और वरिष्ठ अधिकारियों** तक पहुँची तो हड़कंप मच गया। सुबह स्टाफ की अनुपस्थिति के कारण मृत शिशु से जुड़ी जानकारी खोजना भी मुश्किल हो रहा था।

इस लापरवाही के चलते परिजन अब भी अपनी मृत बच्ची के शव के लिए **कैजुअल्टी** में इंतजार कर रहे हैं। अस्पताल अधीक्षक ने मामले की जांच और जिम्मेदारों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

 व्यवस्था पर सवाल

इस घटना ने मेडिकल अस्पताल की व्यवस्थाओं की पोल खोलकर रख दी है। परिजनों और समाजसेवियों का कहना है कि **इतने बड़े अस्पताल में शवों की अदला-बदली जैसी गंभीर लापरवाही यह दर्शाती है कि प्रबंधन को तुरंत अपनी कार्यप्रणाली में सुधार लाना होगा।**