भोपाल: मध्य प्रदेश पुलिस को हाईटेक बनाने की महत्वाकांक्षी योजना, डायल 112, शुरुआती दौर में ही नाकाम होती दिख रही है। सरकार ने इस सेवा के लिए पूरे राज्य में करोड़ों रुपये खर्च कर नई स्कॉर्पियो गाड़ियां दी हैं, लेकिन राजधानी भोपाल में ही इनमें से कई वाहन बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। यह सिर्फ एक सरकारी संपत्ति का नुकसान नहीं है, बल्कि इस महत्वपूर्ण आपातकालीन सेवा की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।


 

चालकों की लापरवाही बनी मुसीबत का सबब

 

डायल 112 के वाहनों के इस हाल के पीछे मुख्य कारण चालकों की लापरवाही को बताया जा रहा है। ये गाड़ियां अभी लॉन्च हुए ज्यादा समय नहीं हुआ है, फिर भी आए दिन इनके दुर्घटनाग्रस्त होने की खबरें आ रही हैं। आरोप है कि जिन चालकों को ये महंगी गाड़ियां सौंपी गई हैं, उनकी ड्राइविंग क्षमता की ठीक से जाँच नहीं की गई है। नतीजा यह है कि हर दिन सरकारी खजाने को लाखों का चूना लग रहा है और किसी बड़े हादसे का खतरा भी लगातार मंडरा रहा है।


 

प्रशासन की चुप्पी और जनता की चिंता

 

पुलिस विभाग के अधिकारियों की चुप्पी इस मामले को और भी गंभीर बना रही है। एक तरफ सरकार लोगों की सुरक्षा के लिए नई तकनीक और सुविधाएं मुहैया करा रही है, वहीं दूसरी तरफ कुछ लापरवाह लोग इस पूरी योजना को बर्बाद कर रहे हैं। इस स्थिति में यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या पुलिस विभाग अपने चालकों के लिए कोई सख्त प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं चला रहा है? क्या इन वाहनों की सुरक्षा की जिम्मेदारी तय नहीं की गई है?

जब तक प्रशासन इस मामले का संज्ञान लेकर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं करता और चालकों के चयन व प्रशिक्षण की प्रक्रिया को दुरुस्त नहीं करता, तब तक यह स्थिति सुधरने वाली नहीं है। डायल 112 सेवा का मकसद लोगों को आपातकालीन स्थिति में तुरंत मदद पहुंचाना है, लेकिन अगर इसके वाहन ही असुरक्षित और क्षतिग्रस्त होंगे, तो यह सेवा अपने उद्देश्य में कैसे सफल हो पाएगी?