जबलपुर: नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज अस्पताल में हुई एक बड़ी लापरवाही ने पूरे शहर को झकझोर दिया है। सोमवार को अस्पताल प्रशासन की घोर लापरवाही सामने आई, जब दो मृत नवजात शिशुओं के शवों की अदला-बदली हो गई। यह चौंकाने वाली घटना तब उजागर हुई जब शोकसंतप्त परिजन अपने बच्चे का अंतिम संस्कार करने श्मशान घाट पहुँचे।

क्या है पूरा मामला?
मेडिकल कॉलेज अस्पताल के नर्सरी विभाग में हाल ही में तीन बच्चों की मौत हुई थी। इनमें से दो नवजातों के शवों को अस्पताल स्टाफ की गलती से बदल दिया गया।

पहला मामला: मझौली के रहने वाले धर्मेंद्र बर्मन की पत्नी सुनीता ने एक मृत बेटी को जन्म दिया था। अस्पताल ने उन्हें जो शव सौंपा, वह एक लड़का था। परिवार को इस गलती का तब पता चला जब वे अंतिम संस्कार के लिए तैयार हो रहे थे। मोक्ष संस्था के आशीष ठाकुर ने इस पर संदेह जताया। यह पता चलते ही परिवार में हंगामा मच गया और वे तुरंत अस्पताल वापस पहुँचे।

दूसरा मामला: इसी तरह, बरेला के एक परिवार को मृत बेटी की जगह एक मृत लड़के का शव दे दिया गया। जब उन्हें खबर लगी कि उनके बच्चे का शव किसी और को दिया गया है, तो वे भी आनन-फानन में अस्पताल पहुँचे।

अस्पताल में हंगामा और प्रशासन की कार्रवाई
परिजनों को जब सच्चाई पता चली तो उन्होंने मेडिकल कॉलेज अस्पताल में जमकर हंगामा किया। सूचना मिलने पर अस्पताल प्रशासन हरकत में आया। एक आंतरिक जांच बिठाई गई, जिसमें नर्सरी विभाग के डॉक्टर और नर्स की घोर लापरवाही सामने आई।

जांच अधिकारियों के सामने, नर्सरी विभाग के स्टाफ ने अपनी गलती स्वीकार कर ली और माफ़ी मांगी। उन्होंने भविष्य में ऐसी गलती न दोहराने का वादा भी किया है। हालांकि, इस घटना ने अस्पताल की कार्यप्रणाली और स्टाफ की संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि एक आपराधिक कृत्य है, जिसने पीड़ित परिवारों के दुख को और बढ़ा दिया है। इस मामले ने यह साबित कर दिया है कि अस्पताल में नवजातों की सुरक्षा और पहचान के लिए कोई पुख्ता व्यवस्था नहीं है।