जबलपुर – नगर निगम में राजस्व से जुड़े मामलों, विशेषकर नामांतरण प्रकरणों में कथित अनियमितताओं की शिकायतों को निगमायुक्त श्रीमती प्रीति यादव ने गंभीरता से लिया है। उन्होंने तत्काल प्रभाव से एक उच्च-स्तरीय जांच दल का गठन किया है, जिसका मुख्य उद्देश्य दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों की पहचान करना और नगर निगम को हुई आर्थिक क्षति का आकलन करना है।

अपर आयुक्त राजस्व श्रीमती अंजू सिंह द्वारा जारी आदेश में इस बात का खुलासा हुआ है कि कलेक्ट्रेट की शिकायत शाखा और अन्य माध्यमों से लगातार यह शिकायतें प्राप्त हो रही थीं कि नगर निगम के राजस्व विभाग के तहत आने वाली संपत्तियों में नियम-विरुद्ध सुधार कार्य किए जा रहे हैं। इन शिकायतों की विस्तृत पड़ताल के बाद यह पाया गया कि संभाग क्रमांक 1 गढ़ा में पदस्थ राजस्व निरीक्षक सौरभ बिरहा के नामांतरण प्रकरणों में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। इन अनियमितताओं से निगम को वित्तीय नुकसान होने की भी आशंका है।

 

जांच दल का गठन और कार्य प्रणाली

शिकायतों की गंभीरता को देखते हुए, एक तीन-सदस्यीय जांच दल का गठन किया गया है। इस दल में उपायुक्त श्रीमती अंकिता जैन को अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जबकि राजस्व निरीक्षक ऋषि कुसरे और किशोर दाहिया को सदस्य बनाया गया है।जांच दल को यह जिम्मेदारी दी गई है कि वह प्राप्त शिकायतों की विस्तृत और निष्पक्ष जांच करे। जांच के दौरान, उन्हें सभी संबंधित दस्तावेज़ों और अभिलेखों की पड़ताल करनी होगी। जांच पूरी होने के बाद, दल को अपनी रिपोर्ट 7 दिनों के भीतर आयुक्त कार्यालय में प्रस्तुत करनी होगी। इस रिपोर्ट में उन्हें अपने स्पष्ट अभिमत के साथ यह तय करना होगा कि कौन से अधिकारी या कर्मचारी दोषी हैं और उनकी जिम्मेदारी कितनी है।

 

भविष्य में होगी कड़ी कार्रवाई

 

निगम प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि जांच में दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। जांच दल की रिपोर्ट के आधार पर, संबंधितों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। यह कदम भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने और नगर निगम के राजस्व को सुरक्षित रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।

यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब जनता की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं और निगम प्रशासन पर पारदर्शी और जवाबदेह व्यवस्था बनाने का दबाव है। इस जांच से यह उम्मीद की जा रही है कि भविष्य में इस तरह की अनियमितताओं पर अंकुश लगेगा और नागरिकों का विश्वास निगम प्रशासन में बहाल होगा।