फर्जी सिकमीनामा से परेशान किसान, 15 सितंबर को बड़े आंदोलन की चेतावनी
जबलपुर, भारतीय किसान संघ के नेतृत्व में सैकड़ों किसानों ने पुलिस अधीक्षक और कलेक्टर से कृषि माफिया के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की गुहार लगाई। किसानों ने आरोप लगाया है कि फर्जी सिकमीनामा (पट्टे पर ज़मीन का अनुबंध) के आधार पर उनकी लगभग 500 एकड़ जमीन पर धोखाधड़ी की गई है। किसानों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि इस मामले में 15 सितंबर तक कोई कार्रवाई नहीं होती है, तो वे एक बड़ा प्रदर्शन करेंगे।
फर्जी सिकमीनामा से किसानों को हो रहा नुकसान
पथरिया गांव के 55 किसानों ने शिकायत की है कि फर्जी सिकमीनामा के कारण वे अपनी फसल को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर नहीं बेच पा रहे हैं। इतना ही नहीं, उन्हें सरकारी खाद वितरण केंद्रों से खाद भी नहीं मिल पा रही है। किसान महेंद्र अवस्थी ने बताया कि इस धोखाधड़ी से उनका साल भर का हक छीन लिया गया है।
भारतीय किसान संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख राघवेंद्र सिंह पटेल ने कहा, "एमएसपी किसान का हक है और इसे छीनने वालों के खिलाफ तुरंत एफआईआर दर्ज कर कठोर दंडात्मक कार्रवाई होनी चाहिए।"
शिकायत के लिए 100 रुपये के स्टाम्प पर दिया शपथ पत्र
किसानों ने अपनी शिकायत को गंभीरता से लेते हुए 100 रुपये के स्टाम्प पेपर पर एक सामूहिक शपथ पत्र के साथ जमा किया। इसमें उन्होंने कहा कि शिकायत में कही गई सभी बातें सच हैं और उनके पास इसके प्रमाण भी हैं। यह शिकायत पुलिस अधीक्षक कार्यालय में मधुर पटेरिया और कलेक्टर कार्यालय में नायब तहसीलदार राजाराम कोल को सौंपी गई।
मूंग खरीदी घोटाले में भी माफिया का हाथ
किसान संघ के महानगर अध्यक्ष राजकुमार पटेल ने बताया कि मूंग उपार्जन केंद्रों पर वेयरहाउस मालिक, समिति प्रबंधक, सर्वेयर और कुछ प्रशासनिक अधिकारियों ने मिलकर एक "कृषि माफिया" का समूह बना लिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना इस माफिया को "फीस" दिए कोई भी किसान अपनी फसल एमएसपी पर नहीं बेच सकता। उन्होंने जिला प्रशासन से दोषियों को बचाने के बजाय उन पर सख्त कार्रवाई करने की मांग की, ताकि प्रशासन और सरकार की छवि खराब न हो।
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