जबलपुर, मध्यप्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री बाल हृदय उपचार योजना एक बार फिर जरूरतमंदों के लिए संजीवनी बनकर सामने आई है। इस योजना के तहत मिली आर्थिक मदद से जबलपुर के 4 महीने के एक मासूम बच्चे श्लोक कनोजिया के हृदय की सफल सर्जरी हुई है, जिसके बाद उसके परिवार में खुशियों का माहौल है। जन्म से ही एक गंभीर हृदय रोग से जूझ रहे श्लोक को अब नया जीवन मिला है।

लाचार माता-पिता और उम्मीद की एक किरण
ललित कॉलोनी, ब्यौहारबाग निवासी अभिषेक कनोजिया और उनका परिवार अपने 4 महीने के बेटे की गंभीर बीमारी से परेशान था। वे जानते थे कि उनके बच्चे के दिल में कोई जन्मजात समस्या है, लेकिन महंगी सर्जरी और इलाज का खर्च उठाना उनके लिए नामुमकिन था। परिवार की लाचारी और बच्चे के भविष्य को लेकर चिंता लगातार उन्हें घेरे हुए थी। इसी दौरान, उनके लिए उम्मीद की एक किरण बनकर राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) की टीम उनके क्षेत्र में पहुंची।

स्वास्थ्य टीम की तत्परता ने बचाई जान
बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण करने के लिए ब्यौहारबाग घमापुर पहुंची राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की टीम में शामिल डॉ. नाज़िया शाह और डॉ. रेनू यादव ने श्लोक की जांच की। जांच के दौरान ही उन्होंने पाया कि बच्चा हृदय रोग से पीड़ित है, जिसकी तुरंत सर्जरी आवश्यक है। इस गंभीर स्थिति को भांपते हुए, टीम ने बिना समय गंवाए श्लोक को जिला अस्पताल के विशेषज्ञ से जांच कराई और तत्काल मुख्यमंत्री बाल हृदय योजना के तहत उसका प्रकरण तैयार किया।

जबलपुर से मुंबई तक का सफर, मिली नई जिंदगी
परिवार की सहमति के बाद, योजना के अंतर्गत श्लोक को हृदय के ऑपरेशन के लिए मुंबई के प्रसिद्ध नारायणा हृदयालय रेफर किया गया। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के जिला प्रबंधक सुभाष शुक्ला ने बताया कि श्लोक की सफल सर्जरी 29 जुलाई को की गई। ऑपरेशन के बाद तेजी से सुधार होने पर उसे 4 अगस्त को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। यह पूरी प्रक्रिया सरकारी योजना के तहत निःशुल्क संपन्न हुई, जिससे परिवार पर कोई आर्थिक बोझ नहीं पड़ा।

श्लोक अब पूरी तरह स्वस्थ है और अपने घर वापस लौट चुका है। उसकी किलकारियाँ और खिलखिलाती मुस्कान अब उसके माता-पिता के लिए सबसे बड़ी खुशी है। यह मामला एक बार फिर यह साबित करता है कि प्रदेश सरकार की ये योजनाएं उन गरीब परिवारों के लिए जीवनदायिनी हैं, जो गंभीर बीमारियों से जूझ रहे अपने बच्चों का इलाज कराने में असमर्थ हैं। यह सिर्फ श्लोक की नहीं, बल्कि उन हजारों बच्चों की कहानी है जिन्हें इन योजनाओं के माध्यम से नया जीवन मिला है।