अभिषेक ज्योतिषी हत्याकांड में पांच आरोपियों को उम्रकैद, पांच बरी:कोर्ट ने कहा – पांच आरोपियों की संलिप्तता साबित नहीं, विवेचना में गंभीर खामियां
मंडला। जिले में चर्चित अभिषेक ज्योतिषी हत्याकांड एवं आनंद ज्योतिषी हत्या के प्रयास मामले में अदालत ने शनिवार को अपना अहम फैसला सुनाया। पंचम अपर सत्र न्यायाधीश बृजेश गोयल की अदालत ने मामले में दस आरोपियों में से पांच को दोषी मानते हुए उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई, वहीं अन्य पांच आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।
यह मामला वर्ष 2021 की मध्यरात्रि का है। उस रात आरोपियों ने घातक हथियारों से लैस होकर विधि विरुद्ध जमाव कर अभिषेक ज्योतिषी पर हमला किया था, जिसमें उनकी मौत हो गई थी। इसी दौरान उनके भाई आनंद ज्योतिषी पर भी जानलेवा हमला हुआ, जिसमें वे गंभीर रूप से घायल हो गए थे। घटना के बाद पुलिस ने कुल दस आरोपियों के विरुद्ध प्रकरण दर्ज कर न्यायालय में अभियोजन प्रस्तुत किया।
जमानत नहीं मिली, विचारण चला तीन साल
प्रकरण दर्ज होने के बाद विचारण के दौरान किसी भी आरोपी को जमानत का लाभ नहीं दिया गया। लंबे विचारण के बाद शनिवार को अदालत ने अपना फैसला सुनाया। इसमें अदालत ने पांच आरोपियों को दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई जबकि बंटी यादव, अमन कछवाहा, अमित तिवारी, आशुतोष कुशवाहा और सौरभ को निर्दोष मानते हुए रिहा कर दिया।
बचाव पक्ष की दलील
बरी हुए आरोपियों की ओर से अधिवक्ता अपूर्व त्रिवेदी ने अदालत में तर्क दिया कि इन आरोपियों को झूठा फंसाया गया है। उनके नाम न तो एफआईआर में थे और न ही प्रारंभिक शिकायत (देहाती नालिश) में। घटना के 12 दिन बाद शिकायतकर्ता के बयान के आधार पर इन आरोपियों के नाम जोड़े गए। अधिवक्ता ने यह भी कहा कि विवेचक ने उनके खिलाफ कोई अलग से जांच नहीं की और न ही पहचान परेड कराई गई।
गवाहों की गवाही पर उठे सवाल
अदालत ने विचारण के दौरान चश्मदीद गवाह पूजा ज्योतिषी और आनंद ज्योतिषी की गवाही पर भी सवाल खड़े किए। न्यायालय ने माना कि उनकी गवाही में विरोधाभास हैं और उनका आचरण संदेह पैदा करता है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि उनकी गवाही विश्वास योग्य नहीं है और इससे पांच आरोपियों की संलिप्तता साबित नहीं होती।
विवेचना पर अदालत की टिप्पणी
न्यायालय ने माना कि विवेचना अधिकारी नीलेश दोहरे ने घटना के 12 दिन बाद जिन आरोपियों को आरोपित किया, उनके संबंध में किसी प्रकार की स्वतंत्र जांच नहीं की गई। यह भी तथ्य सामने आया कि नाम बाद में जोड़ने के बावजूद पहचान परेड जैसी कानूनी प्रक्रिया पूरी नहीं की गई। इन खामियों के चलते अदालत ने पांच आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया।
फैसले से दोहरी प्रतिक्रिया
फैसले के बाद मृतक अभिषेक ज्योतिषी के परिजनों ने अदालत के इस निर्णय को आंशिक न्याय करार दिया। उनका कहना है कि दोषियों को सजा मिलना स्वागत योग्य है, लेकिन वे उन पांच आरोपियों की रिहाई से असंतुष्ट हैं। वहीं, बरी हुए आरोपियों के परिजनों ने राहत की सांस ली और कहा कि न्यायालय ने सही फैसला सुनाकर निर्दोषों को सम्मान दिलाया।
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