संजय गांधी ताप विद्युत केंद्र में सुरक्षा को लेकर प्रश्न चिन्ह? बिना पुलिस वेरीफिकेशन गेट पास जारी
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उमरिया - जिले के बिरसिंहपुर पाली में स्थित संजय गांधी ताप विद्युत केंद्र एक बार फिर सुरक्षा को लेकर कई सवाल उठ रहे है। केंद्र में काम करने वाले अस्थाई ठेका श्रमिकों को बिना पुलिस वेरिफिकेशन के गेट पास जारी किए जाने का मामला सामने आया है। यह लापरवाही उस समय और गंभीर हो जाती है जब केंद्र में 9 अगस्त 2025 से शुरू हुए 60 दिनों के शटडाउन में सैकड़ों की संख्या में श्रमिक विभिन्न यूनिटों में मेंटेनेंस कार्य कर रहे हैं।
बताया जाता है कि इस दौरान केवल स्थानीय ही नहीं बल्कि अन्य राज्यों से भी बड़ी संख्या में ठेका श्रमिक यहां आते हैं। ऐसे में बिना पुख्ता जांच और पुलिस सत्यापन के गेट पास जारी करना सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता खड़ी करता है।
सुरक्षा अधिकारी का बयान
मामले पर जब संजय गांधी ताप विद्युत केंद्र के सुरक्षा अधिकारी एसके दुबे से बात की गई तो उन्होंने स्वीकार किया कि स्थाई कर्मचारी, जो एक साल या उससे अधिक समय तक कार्यरत रहते हैं, उनके लिए पुलिस वेरिफिकेशन करवाना अनिवार्य है। लेकिन अस्थाई ठेका श्रमिकों के मामले में केवल आधार कार्ड ले कर ही गेट पास जारी किया जाता है।
दुबे ने कहा, यह कोई नई व्यवस्था नहीं है। कई वर्षों से इसी तरह किया जा रहा है। हालांकि हमने ठेका श्रमिकों की सूची बनाकर पुलिस चौकी को भेज दी है।
उनका यह बयान साफ करता है कि प्रबंधन इस व्यवस्था को सामान्य मानकर चला आ रहा है, जबकि देश की महत्वपूर्ण संपत्ति और ऊर्जा उत्पादन का केंद्र होने के नाते यहां सुरक्षा में जरा भी लापरवाही गंभीर खतरे को न्योता दे सकती है।
क़्या कहते है जिम्मेदार पाली थाना प्रभारी
पाली थाना प्रभारी राजेश चंद्र मिश्रा ने कहा कि पुलिस इस मामले को गंभीरता से लेगी। उन्होंने बताया कि कंपनी प्रबंधन को पत्र जारी कर बाहर से आने वाले श्रमिकों की पूरी जानकारी मांगी जाएगी। श्री मिश्रा का कहना है कि बिना वेरिफिकेशन किसी को गेट पास जारी करना सुरक्षा नियमों के खिलाफ है।
सवालों के घेरे मे प्रबंधन
बताया जाता है कि देशभर में चल रहे सभी प्रमुख ताप विद्युत केंद्रों में ठेका श्रमिकों की नियुक्ति आम बात है। लेकिन इन श्रमिकों के पुलिस वेरिफिकेशन की प्रक्रिया को नजरअंदाज करना सीधे तौर पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी है।
संजय गांधी ताप विद्युत केंद्र न केवल मध्यप्रदेश की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करता है बल्कि यह संवेदनशील औद्योगिक प्रतिष्ठान भी है। यहां पर किसी भी तरह की सुरक्षा चूक बड़ी घटना का कारण बन सकती है।
स्थानीय नागरिकों और श्रमिक संगठनों का भी कहना है कि गेट पास जारी करने की मौजूदा व्यवस्था बेहद ढीली है। केवल आधार कार्ड देखकर किसी बाहरी व्यक्ति को प्रवेश देना जोखिम भरा है, क्योंकि आधार कार्ड पर दी गई जानकारी की वास्तविकता मौके पर जांचे बिना पुष्टि नहीं की जा सकती।
श्रमिकों की भीड़ और जोखिम
शटडाउन की अवधि में यहां बड़ी संख्या में श्रमिक जुटते हैं। इनमें मशीनरी के विशेषज्ञों से लेकर साधारण मजदूर तक शामिल होते हैं। असल चुनौती इनकी पहचान और सत्यापन की है। जब सैकड़ों लोग रोजाना प्लांट में आ जा रहे हों तो उनकी गतिविधियों पर नियंत्रण रखना तभी संभव है जब सभी की पूरी जानकारी पुलिस और प्रबंधन दोनों के पास उपलब्ध हो।
जानकार कहते हैं कि यह स्थिति केवल सुरक्षा के लिए ही नहीं बल्कि कानून व्यवस्था के लिहाज से भी चिंताजनक है। यदि बिना सत्यापन कोई अपराधी या असामाजिक तत्व प्लांट में प्रवेश कर जाता है तो न केवल उत्पादन प्रभावित हो सकता है बल्कि आसपास के इलाके में भी बड़ा खतरा पैदा हो सकता है।
लंबे समय से जारी लापरवाही
सुरक्षा अधिकारी के बयान से यह स्पष्ट है कि यह व्यवस्था वर्षों से चली आ रही है। सवाल यह है कि इतनी बड़ी चूक के बावजूद अब तक प्रबंधन ने इस पर ठोस कदम क्यों नहीं उठाए। सुरक्षा के मामले में पुरानी प्रथा को जारी रखना किसी भी दृष्टिकोण से उचित नहीं ठहराया जा सकता।
*कंपनी प्रबंधन की जिम्मेदारी
संजय गांधी ताप विद्युत केंद्र मुख्य अभियंता एच के त्रिपाठी इस बात के लिए पूरी तरह जिम्मेदार है कि वहां प्रवेश करने वाला हर व्यक्ति जांच परखा हुआ हो। यह तर्क कि सूची पुलिस चौकी को भेज दी गई है, पर्याप्त नहीं माना जा सकता। सूची भेजने और वास्तविक सत्यापन के बीच बड़ा अंतर है। जब तक हर श्रमिक का पुलिस वेरिफिकेशन पूरा न हो, तब तक उसे गेट पास देना सुरक्षा के लिहाज से लापरवाही ही कहलाएगा।
संजय गांधी ताप विद्युत केंद्र में सामने आई यह लापरवाही सुरक्षा की गंभीर खामियों को उजागर करती है। पुलिस ने इस मामले में सख्त रुख दिखाने की बात कही है, लेकिन सबसे बड़ी जिम्मेदारी कंपनी प्रबंधन की है। देश के संवेदनशील ऊर्जा प्रतिष्ठान में काम करने वाले हर श्रमिक की पहचान पुख्ता होनी चाहिए। अन्य राज्यों से आए सैकड़ों श्रमिकों को बिना जांच परखे प्रवेश देना किसी भी तरह स्वीकार्य नहीं है। अब देखना होगा कि पुलिस और प्रबंधन मिलकर इस व्यवस्था को सुधारने के लिए कौन से ठोस कदम उठाते हैं।
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