रेलवे अस्पताल में बदइंतजामी की पराकाष्ठा: ICU में भी टूटे-फूटे पलंग, मरीज की जान पर संकट
जबलपुर: शहर का रेलवे अस्पताल गंभीर बदइंतजामी और लापरवाही का शिकार हो गया है, जिससे मरीजों की जान खतरे में है। अस्पताल के वार्डों से लेकर आईसीयू तक में स्वास्थ्य उपकरणों का अभाव और टूटे-फूटे सामान की भरमार है। मरीजों के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जिनमें भ्रष्टाचार और जवाबदेही की कमी मुख्य है।
बीपी, पल्स मॉनिटर सिर्फ दिखावे के लिए, एक साल से नहीं हो रही मरम्मत
मरीजों के परिजनों के अनुसार, अस्पताल में मरीजों का रक्तचाप (BP) नापने के लिए लगाए गए मॉनिटर सिर्फ 'दिखावे के लिए' हैं और काम नहीं करते। इसी तरह, पल्स (Pulse) और SPO₂ (ऑक्सीजन सैचुरेशन) मापने वाले उपकरण भी खराब हैं या उपलब्ध ही नहीं हैं। यह समस्या पिछले एक साल से बनी हुई है, लेकिन अस्पताल प्रशासन ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया है। इन उपकरणों के काम न करने से मरीजों की सही स्थिति का पता लगाना मुश्किल हो जाता है, जिससे उनके उपचार में बाधा आ रही है।
आईसीयू के पलंग टूटे, रिमोट काम नहीं करता
अस्पताल के आईसीयू की हालत तो और भी खराब है। परिजनों ने बताया कि यहाँ न सिर्फ रक्तचाप मॉनिटरिंग सिस्टम खराब है, बल्कि कई पलंग भी टूट चुके हैं। इन पलंगों का रिमोट काम नहीं करता, जिससे मरीजों को पलटने, बैठाने या उनके सिरहाने की ऊँचाई को व्यवस्थित करने में भारी दिक्कत आती है। इसके चलते मरीजों के पलंग से गिरने का खतरा भी बना रहता है। इसके अलावा, वार्ड में इस्तेमाल होने वाली व्हील चेयर और स्ट्रेचर के पहिए भी खराब हैं, जिससे मरीजों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाते समय उनके गिरने की पूरी-पूरी संभावना रहती है।
'अकस्मात मृत्यु' की सहमति और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप
अस्पताल में भर्ती मरीजों के परिजनों ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जब मरीज को आईसीयू में भर्ती किया जाता है, तो उनसे 'अकस्मात मृत्यु' की सहमति पहले ही ले ली जाती है। यह एक ऐसा कदम है, जो सीधे तौर पर मरीजों की जान की सुरक्षा पर सवाल उठाता है। परिजनों ने यह भी बताया कि अस्पताल के अधिकारी मरीजों का हाल-चाल जानने के लिए कभी राउंड नहीं लेते, जिससे वे अपनी परेशानियाँ बता नहीं पाते। मौजूद स्टाफ से पूछने पर वे कोई सहयोग नहीं करते और चुपचाप खड़े रहते हैं। परिजनों का आरोप है कि मुख्य नर्स द्वारा दी गई गलत रिपोर्ट को ही मान्य किया जाता है, जिसके बाद स्टाफ को परेशान किया जाता है। ड्यूटी लगाने और छुट्टी देने में भी भ्रष्टाचार होने का आरोप है, जिस पर अस्पताल प्रबंधक ने कथित तौर पर कहा, "जैसा चल रहा है चलने दो।" यह स्थिति साफ तौर पर दर्शाती है कि मरीजों की जान की परवाह किए बगैर अस्पताल में मनमानी चल रही है। नागरिकों ने इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जाँच की मांग की है, ताकि जिम्मेदार लोगों पर कड़ी कार्रवाई हो और अस्पताल में बेहतर व्यवस्थाएँ सुनिश्चित की जा सकें।
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