ज़िंदा व्यक्ति की ज़मीन बेचकर लाखों का लोन लिया, आधार लिंक कराने गए तो हुआ खुलासा; 8 लोगों पर केस दर्ज
जबलपुर: शहर में एक हैरान कर देने वाला जमीन धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। एक व्यक्ति ने अपनी 33 साल पुरानी पुश्तैनी जमीन को तब फर्जी तरीके से बेचा हुआ पाया, जब वह अपनी संपत्ति को आधार कार्ड से लिंक कराने गया। इस सनसनीखेज धोखाधड़ी में एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश हुआ है, जिसने जाली दस्तावेजों से न सिर्फ जमीन का सौदा किया, बल्कि उस पर ₹52 लाख का लोन भी ले लिया। पुलिस ने इस मामले में 8 लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी का मामला दर्ज किया है।
33 साल से रह रहा था, रेवेन्यू रिकॉर्ड में दिखा दूसरे का नाम
मामले के शिकायतकर्ता अमर सिंह ठाकुर ने पुलिस को बताया कि उन्होंने साल 1991 में राष्ट्रीय गृह निर्माण सहकारी समिति से माढ़ोताल में 2400 वर्ग फुट का प्लॉट नंबर 146 खरीदा था। उन्होंने इस प्लॉट पर मकान बनाकर पिछले 33 वर्षों से परिवार के साथ रह रहे हैं। हाल ही में, जब वह अपनी संपत्ति को आधार कार्ड से लिंक कराने एक ऑनलाइन सेंटर गए, तो उन्हें पता चला कि राजस्व रिकॉर्ड में उनकी जमीन पर किसी संदीप श्रीवास्तव का नाम दर्ज हो गया है।
'फर्जी' अमर सिंह बनकर कर दिया सौदा
अमर सिंह ने तुरंत ऑनलाइन दस्तावेजों की पड़ताल की, तो उन्हें पता चला कि साल 2019 में एक फर्जी व्यक्ति ने, जिसका नाम भी अमर सिंह ठाकुर था (असली नाम सतेन्द्र उपाध्याय), उनकी संपत्ति को संदीप श्रीवास्तव को बेच दिया था। यह धोखाधड़ी बेहद शातिराना तरीके से की गई थी।
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जाली आधार कार्ड: फर्जी अमर सिंह ने एक जाली आधार कार्ड का इस्तेमाल किया, जिसका नंबर असली अमर सिंह के आधार से अलग था।
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फर्जी दस्तावेज: आरोपियों ने अमर सिंह के असली विक्रय पत्र की फोटोकॉपी का दुरुपयोग कर एक जाली विक्रय पत्र तैयार किया था।
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उम्र का झोल: जाली दस्तावेज में फर्जी अमर सिंह की उम्र 34 साल बताई गई थी। जबकि अगर यह सौदा असली होता, तो 1991 में जब असली प्लॉट खरीदा गया था, तब उसकी उम्र केवल 6 साल होनी चाहिए, जो कि संभव नहीं है।
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मौके पर प्लॉट, जबकि बना है मकान: फर्जी दस्तावेज में संपत्ति को खाली प्लॉट बताया गया था, जबकि मौके पर अमर सिंह का 33 साल पुराना मकान मौजूद है।
पूरे गिरोह का पर्दाफाश, फर्जी रजिस्ट्री से लाखों का लोन
पुलिस की जाँच में इस पूरे रैकेट का खुलासा हुआ। संदीप श्रीवास्तव ने अन्य षड्यंत्रकारियों जैसे शशांक गौतम, असलम खान और भानु प्रकाश के साथ मिलकर इस पूरी साजिश को अंजाम दिया था। उन्होंने न सिर्फ अमर सिंह की जमीन को फर्जी तरीके से बेचा, बल्कि एक अन्य महिला शांति बाई कोष्टा की जमीन का हिस्सा भी इसी तरह जाली दस्तावेजों से बेच दिया था।
सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ कि धोखाधड़ी से संपत्ति अपने नाम कराने के बाद, संदीप श्रीवास्तव ने पंजाब नेशनल बैंक से उसी जमीन को गिरवी रखकर ₹52,60,000 का भारी-भरकम लोन भी ले लिया।
इस मामले में पुलिस ने संदीप श्रीवास्तव, सतेन्द्र उपाध्याय, शशांक गौतम, शांति बाई, मोहित तिवारी, अंचल दुबे, असलम खान और भानु प्रकाश के खिलाफ धारा 419, 420, 467, 468, 471 और 120 बी के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अब इन सभी आरोपियों की तलाश कर रही है।
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