भोपाल: भोपाल क्राइम ब्रांच ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए टीकमगढ़ जिले में चल रही दो अवैध हथियार फैक्ट्रियों का भंडाफोड़ किया है। इस ऑपरेशन में एक संगठित अंतर्राज्यीय नेटवर्क का खुलासा हुआ है, जो पिछले 35-40 सालों से अवैध हथियारों का निर्माण और बिक्री कर रहा था। इस गिरोह का नेतृत्व एक ही परिवार की तीन पीढ़ियां कर रही थीं, जिन्होंने कई बार जेल जाने के बावजूद भी अपना धंधा जारी रखा।

 

दो ठिकानों पर चल रहा था काला कारोबार

 

क्राइम ब्रांच की टीम ने गहन जांच के बाद पाया कि यह अवैध धंधा दो अलग-अलग जगहों से चलाया जा रहा था। पहली फैक्ट्री मुख्य आरोपी के पैतृक निवास, ग्राम चंदेरी, थाना कुड़ीला, टीकमगढ़ में थी, जबकि दूसरी और अधिक गोपनीय फैक्ट्री वेयरहाउस में, ग्राम रामगढ़, थाना जतारा, टीकमगढ़ में स्थापित की गई थी। इस दूसरे ठिकाने को किराए पर लिया गया था और वेयरहाउस के मालिक को भी मुनाफे का लालच देकर इसमें शामिल कर लिया गया था।

 

खुद बनाते थे हथियार के हर पुर्जे

 

इस गिरोह के काम करने का तरीका बेहद शातिर था। आरोपी हथियार बनाने के लिए आवश्यक सभी पुर्जे बाहर से खरीदने की बजाय खुद ही तैयार करते थे। इससे न केवल उनके मुनाफे में बढ़ोतरी होती थी, बल्कि वे अपने कारोबार को और भी गोपनीय रख पाते थे। हथियार बनाने में इस्तेमाल होने वाली लेथ मशीन का इस्तेमाल कृषि उपकरण बनाने की आड़ में किया जाता था। क्राइम ब्रांच ने दोनों फैक्ट्रियों से बड़ी मात्रा में अधबने हथियार और कलपुर्जे जब्त किए हैं, जिनसे दर्जनों अवैध हथियार बनाए जा सकते थे।

 

यूपी था मुख्य बाजार

 

जांच में यह भी सामने आया कि यह नेटवर्क मध्य प्रदेश में अवैध हथियार बेचने से बचता था। इसका मुख्य कारण यहाँ पकड़े जाने का अधिक जोखिम और कम मुनाफा था। यही कारण है कि ये गिरोह अपने हथियारों की मुख्य सप्लाई पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश में करता था। परिवार के सदस्यों को ही इस काम में शामिल करके ये लोग इस धंधे को पीढ़ी-दर-पीढ़ी चला रहे थे।

भोपाल क्राइम ब्रांच की यह कार्रवाई अवैध हथियारों के नेटवर्क पर एक बड़ा प्रहार है। इस खुलासे ने यह साबित कर दिया है कि अपराधी जेल जाने के बाद भी अपने मंसूबों से बाज नहीं आते। पुलिस की इस सफलता से इस तरह के संगठित अपराधों पर लगाम लगाने में मदद मिलेगी।