जबलपुर। जबलपुर में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत गरीबों के लिए आए राशन में एक बड़ा घोटाला सामने आया है। ₹2,20,12,460 मूल्य के राशन की हेराफेरी के आरोप में पुलिस ने 33 लोगों पर धोखाधड़ी और आवश्यक वस्तु अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। इस मामले में न सिर्फ राशन दुकान संचालक, बल्कि खाद्य विभाग के तत्कालीन वरिष्ठ अधिकारी भी आरोपी बनाए गए हैं।


 

क्या है पूरा मामला?

 

यह पूरा मामला अगस्त से अक्टूबर 2022 के बीच का है। उस दौरान जबलपुर की 11 उचित मूल्य की दुकानों से लाखों किलोग्राम गेहूं, चावल, नमक और शक्कर गायब हो गया था। संयुक्त कलेक्टर ऋषभ जैन द्वारा दी गई शिकायत के अनुसार, राशन की यह हेराफेरी सीधे तौर पर नहीं, बल्कि डिजिटल तरीके से की गई।

जांच में सामने आया कि AePDS पोर्टल पर मौजूद राशन के स्टॉक को अवैध तरीके से कम कर दिया गया। आयुक्त, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, मध्यप्रदेश ने जब एनआईसी हैदराबाद से इस संबंध में जानकारी मांगी, तो पता चला कि यह पूरा खेल कुछ विशिष्ट आईपी एड्रेस (27.56.249.185 और 157.34.236.76) के जरिए किया गया। ये आईपी एड्रेस विभाग के नहीं थे, बल्कि जबलपुर नगर निगम क्षेत्र के यूजर आईडी (jso_2363702 और jso_23637) से इस्तेमाल किए जा रहे थे।


 

किन पर लगे हैं आरोप?

 

इस घोटाले में कुल 33 लोग नामजद आरोपी हैं। इनमें अनुविभाग गोरखपुर और गोहलपुर की 11 राशन दुकानों के संचालक, अध्यक्ष, विक्रेता और सहायक विक्रेता शामिल हैं। इसके अलावा, खाद्य विभाग के तत्कालीन वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है। एफआईआर में तत्कालीन जिला आपूर्ति नियंत्रक श्रीमती नुजहत बानो बकाई, कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी श्रीमती भावना तिवारी और श्रीमती सुचिता दुबे, और डिस्ट्रिक्ट प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग यूनिट (DPMU) के श्री अक्षय कुमार खरे के नाम भी शामिल हैं।

शिकायत में कहा गया है कि इन अधिकारियों ने अपने कर्तव्य पालन में घोर लापरवाही और उदासीनता बरती। अधिकारियों को पता होने के बावजूद कि इतना बड़ा स्टॉक गायब है, उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की। इससे साफ जाहिर होता है कि वे इस घोटाले में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से शामिल थे। यह भी आरोप है कि बिना DPMU की जानकारी के पोर्टल से स्टॉक को घटाना संभव ही नहीं था।


 

कैसे हुआ था घोटाला?

 

जाँच रिपोर्ट के मुताबिक, ₹2,20,12,460 का स्टॉक राशन दुकान संचालकों द्वारा गबन किया गया। इसके बाद, घोटाले की गई मात्रा को पीओएस मशीन/पोर्टल से अवैध रूप से घटाया गया, ताकि कोई रिकॉर्ड न बचे। इस काम में राशन दुकान संचालकों के साथ-साथ सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत भी साफ तौर पर सामने आई है, क्योंकि शासकीय पोर्टल तक पहुंच सिर्फ उन्हीं के पास थी।

संयुक्त कलेक्टर ने अपनी शिकायत में कहा है कि यह आपराधिक कृत्य भारतीय न्याय संहिता, आवश्यक वस्तु अधिनियम और मध्यप्रदेश सार्वजनिक वितरण प्रणाली नियंत्रण आदेश के तहत एक दंडनीय अपराध है। पुलिस अब मामले की गहन जांच कर रही है ताकि सभी दोषियों को सजा मिल सके।