जबलपुर: अब तक चिकित्सा के क्षेत्र में राष्ट्रीय पहचान रखने वाला जबलपुर अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी छाप छोड़ रहा है। हाल ही में, जबलपुर में विकसित की गई आधुनिक चिकित्सा तकनीकों ने देश के दो सबसे प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों में अपनी जगह बनाई है। जबलपुर के डॉक्टरों ने न केवल दिल्ली के एक वैश्विक मंच पर लाइव सर्जरी का प्रदर्शन किया, बल्कि उनकी 'माइक्रोवेव एब्लेशन' तकनीक का उपयोग कर लखनऊ के एक प्रमुख अस्पताल में पहली बार सफल ऑपरेशन भी किया गया।

 

एसजीपीजीआई लखनऊ में जबलपुर की 'बिना टांके' वाली तकनीक का इस्तेमाल

 

लखनऊ के संजय गांधी पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SGPGI) ने हाल ही में चिकित्सा जगत में एक बड़ा कदम उठाया। संस्थान में पहली बार माइक्रोवेव एब्लेशन नामक अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग कर एक मरीज के स्तन में फाइब्रोएडीनोमा (फाइब्रॉएड) और एक अन्य मरीज के थायरॉइड नोड्यूल का सफल उपचार किया गया। यह तकनीक विशेष है क्योंकि इसमें किसी तरह का चीरा या टांके नहीं लगाए जाते, जिससे मरीज को सर्जरी के बाद होने वाली असुविधा और रिकवरी का समय काफी कम हो जाता है।

यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह तकनीक जबलपुर में कई सालों से सफलतापूर्वक उपयोग में लाई जा रही है। इसका मतलब यह है कि अब मेट्रो शहरों के बड़े अस्पताल भी जबलपुर में शुरू हुई इस पायोनियर तकनीक को अपना रहे हैं, जो जबलपुर के चिकित्सा नवाचारों के लिए एक बड़ी मान्यता है।


 

वैश्विक मंच पर गूँजा जबलपुर का नाम

इसी बीच, दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित सोसाइटी ऑफ एंडोस्कोपिक एंड लैप्रोस्कोपिक सर्जन्स ऑफ इंडिया (SELSICON) ग्लोबल कॉन्फ्रेंस में भी जबलपुर के डॉक्टरों ने अपनी विशेषज्ञता का लोहा मनवाया। इस प्रतिष्ठित सम्मेलन में, जबलपुर के दो वरिष्ठ सर्जनों, डॉ. प्रदीप कोठिया और उनके सहयोगी को ट्रांसओरल एंडोस्कोपिक थायरॉइड सर्जरी (TOETVA) का लाइव डेमो प्रस्तुत करने का मौका मिला।

यह प्रदर्शन 1,200 से अधिक भारतीय और विदेशी सर्जनों के सामने किया गया। यह एक ऐसा मंच था, जहाँ दुनिया भर के विशेषज्ञ एक साथ जुटे थे और उनके सामने जबलपुर के डॉक्टरों ने अपनी उन्नत सर्जिकल तकनीकों का सीधा प्रदर्शन किया। यह घटना दर्शाती है कि जबलपुर अब सिर्फ एक क्षेत्रीय चिकित्सा केंद्र नहीं रहा, बल्कि यह स्तन और एंडोक्राइन सर्जरी के क्षेत्र में एक वैश्विक अग्रणी बनकर उभरा है।

इन दोनों घटनाओं ने यह साबित कर दिया है कि जबलपुर में शुरू हुई और विकसित की गई चिकित्सा तकनीकें और विशेषज्ञता अब देश और विदेश में मान्यता प्राप्त कर रही हैं। यह जबलपुर के लिए एक गौरवपूर्ण क्षण है और निश्चित रूप से यहाँ चिकित्सा पर्यटन को भी एक नई दिशा देगा।