जबलपुर। किसानों के हित में चलाई जा रही शासन की उपार्जन व्यवस्था पर अब सवाल खड़े हो रहे हैं। रानी दुर्गावती जिले के शहपुरा स्थित 64 एम.एल.टी. वेयरहाउस मजीठा में मूंग और उड़द की खरीदी में बड़े घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि समिति प्रबंधक, कंप्यूटर ऑपरेटर, बैंक प्रबंधक, सर्वेयर और गोदाम संचालक समेत कई जिम्मेदारों ने मिलकर करीब 1.86 करोड़ रुपये का गबन किया है।


कैसे हुआ घोटाले का खुलासा?

कलेक्टर जबलपुर के आदेश पर गठित जिला स्तरीय जांच दल ने 7 अगस्त 2025 को वेयरहाउस का भौतिक सत्यापन किया।

  • ई-उपार्जन पोर्टल पर मूंग की 12,928 क्विंटल और उड़द की 8,736 क्विंटल खरीदी दर्ज थी।

  • लेकिन मौके पर सिर्फ मूंग 11,552 क्विंटल और उड़द 8,844.5 क्विंटल ही मिली।

  • यानी 1,000 क्विंटल से अधिक का अंतर सामने आया।

  • इसके अलावा 558 क्विंटल मूंग और 361.5 क्विंटल उड़द बिना ऑनलाइन एंट्री के गोदाम में स्टोर पाई गई।

  • जांच में किसानों की फर्जी एंट्री और कागजात भी जब्त हुए।

इससे साफ हुआ कि फर्जी पंजीयन कर अनाज का गोलमाल किया गया।


जांच में सामने आए आरोपी और उनकी भूमिका

  • कमल सिंह ठाकुर (समिति प्रबंधक) – सुरक्षित भंडारण और लेखा मिलान नहीं किया, फर्जी एंट्रियां कराईं।

  • राजपाल सिंह व दीपेंद्र सिंह ठाकुर (कंप्यूटर ऑपरेटर) – तौल पर्ची और पावती जारी नहीं की, दैनिक रिपोर्टिंग में हेरफेर।

  • अजय तिवारी (प्रभारी शाखा प्रबंधक, जिला सहकारी बैंक शहपुरा) – निरीक्षण नहीं किया, बाहरी व्यक्तियों को खरीदी में शामिल कराया।

  • अंकित सिंह उर्फ राजशेखर, शंभु ठाकुर, बिंदु राय – फर्जी तरीके से तुलाई और ऑनलाइन एंट्री।

  • रोहित यादव व देवेंद्र यादव (सर्वेयर) – बिना माल आए ही FAQ परीक्षण कर तौल पर्ची जारी की।

  • आदेश तिवारी (गोदाम संचालक) – किसानों का माल मिलाकर पैकिंग, टैगिंग में गड़बड़ी और सीसीटीवी फुटेज प्रस्तुत न करने जैसी गड़बड़ियां।


किसानों के नाम पर फर्जी खरीदी

भारतीय किसान संघ की रिपोर्ट में सामने आया कि ग्राम पथरिया के 13 किसानों के नाम पर फर्जी पंजीयन कराया गया। उनके खसरे जोड़कर 561.50 क्विंटल मूंग की खरीदी कागजों पर दिखाई गई, जबकि वास्तविकता में माल मौजूद ही नहीं था।


एफआईआर और आगे की कार्रवाई

उपसंचालक किसान कल्याण एवं कृषि विकास कार्यालय जबलपुर के सहायक संचालक रवि कुमार आम्रवंशी ने प्रतिवेदन प्रस्तुत किया।
इसके आधार पर भेड़ाघाट पुलिस ने समिति प्रबंधक, कंप्यूटर ऑपरेटर, बैंक प्रबंधक, सर्वेयर और वेयरहाउस संचालक समेत कई जिम्मेदारों पर धारा 318(4), 336(3), 338, 61(2) बीएनएस के तहत प्रकरण दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है।


करोड़ों तक पहुंच सकता है आंकड़ा

सूत्रों का कहना है कि यह गड़बड़ी केवल 1.86 करोड़ तक सीमित नहीं है। जांच अगर गहराई से हुई तो यह आंकड़ा 20 से 25 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है, क्योंकि यह खेल पिछले तीन सालों से लगातार चल रहा था।


प्रशासनिक मिलीभगत पर सवाल

जांच रिपोर्ट ने यह भी इशारा किया है कि इस घोटाले में प्रशासनिक स्तर पर मिलीभगत रही है। इतने बड़े पैमाने पर गड़बड़ी होने के बावजूद अधिकारियों को जानकारी न होना अपने आप में सवाल खड़ा करता है।