जबलपुर के नए कलेक्टर राघवेंद्र सिंह का कड़क मिजाज:नायब तहसीलदार का डिमोशन कर बना दिया था पटवारी
आगर मालवा में नायब तहसीलदार को किया था डिमोट, बनाया था पटवारी – अब जबलपुर में भी दिखेगी सख्ती?
जबलपुर। मध्यप्रदेश शासन ने बड़े प्रशासनिक फेरबदल के बीच राघवेंद्र सिंह को संस्कारधानी जबलपुर का नया कलेक्टर नियुक्त किया है। उनकी सख्त कार्यशैली और कड़े निर्णय लेने की प्रवृत्ति को लेकर पहले से ही चर्चाएं तेज हो गई हैं।
दरअसल, जब वे आगर मालवा कलेक्टर थे, तब फरवरी 2025 में उन्होंने एक ऐसी कार्रवाई की थी, जिसने प्रदेशभर का ध्यान खींचा था। उन्होंने एक नायब तहसीलदार को डिमोट कर पटवारी बना दिया। इस कार्रवाई के पीछे कारण था— कामकाज में गंभीर लापरवाही और जवाबदेही की कमी। यह कदम इतना बड़ा और असामान्य था कि इसे लेकर पूरे प्रदेश में जमकर चर्चाएं हुईं।
प्रदेश में चर्चित हुई थी कार्रवाई
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आमतौर पर लापरवाह अधिकारियों पर चेतावनी, निलंबन या तबादले की कार्रवाई होती है।
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लेकिन नायब तहसीलदार को सीधे पटवारी बना देना एक ऐतिहासिक और दुर्लभ निर्णय माना गया।
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प्रशासनिक हल्कों में इसे "जवाबदेही की मिसाल" करार दिया गया था।
जबलपुर में भी कड़ाई की उम्मीद
अब जब राघवेंद्र सिंह जबलपुर कलेक्टर की कुर्सी संभालने जा रहे हैं, तो कयास लगाए जा रहे हैं कि वे यहां भी:
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अफसरशाही की ढिलाई और भ्रष्टाचार पर नकेल कसेंगे।
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राजस्व और उपार्जन कार्यों में पारदर्शिता को प्राथमिकता देंगे।
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किसानों और आम नागरिकों की शिकायतों पर त्वरित और कठोर एक्शन लेंगे।
शहरवासियों की प्रतिक्रिया
जबलपुर के बुद्धिजीवी वर्ग और व्यापारी संगठनों का मानना है कि अगर नए कलेक्टर इसी तरह की सख्त और निष्पक्ष प्रशासनिक कार्यशैली अपनाते हैं, तो शहर की कई पुरानी समस्याओं पर अंकुश लग सकता है।
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खासकर अवैध कॉलोनियों, भ्रष्टाचार और राजस्व गड़बड़ियों पर अंकुश की उम्मीद की जा रही है।
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वहीं सरकारी अमले में भी खलबली मची है, क्योंकि राघवेंद्र सिंह को लेकर यह धारणा है कि वे कामकाज में ढिलाई बर्दाश्त नहीं करते।
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