जबलपुर: जबलपुर से घटती एयर कनेक्टिविटी का मामला अब भी न्यायिक पटल पर है। इस संबंध में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए, हाईकोर्ट में विमानन कंपनियों ने अपनी रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में पेश कर दी है। इस रिपोर्ट में यात्रियों के कमर्शियल डेटा के आधार पर उड़ानों की संख्या कम होने के कारणों का विश्लेषण किया गया है।


 

जनहित याचिका और नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच की पहल

जबलपुर से कनेक्टिविटी बढ़ाने की मांग को लेकर नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच की ओर से यह जनहित याचिका दायर की गई है। मंच का तर्क है कि जबलपुर एक महत्वपूर्ण शहर है, जहां उच्च न्यायालय, सेना की महत्वपूर्ण छावनी और कई सरकारी प्रतिष्ठान हैं। इसके बावजूद, हवाई सेवा का सीमित होना शहर के आर्थिक और सामाजिक विकास में बाधा बन रहा है। मंच ने कोर्ट से मांग की है कि वह विमानन कंपनियों को जबलपुर से अधिक शहरों के लिए सीधी उड़ानें शुरू करने के निर्देश दे।


 

विमानन कंपनियों का जवाब

 

इस मामले में, विभिन्न विमानन कंपनियों ने अपनी रिपोर्ट हाईकोर्ट में प्रस्तुत की है। इन रिपोर्ट्स में उड़ानों के संचालन में आने वाली आर्थिक चुनौतियों, यात्रियों की संख्या और रूट की लाभप्रदता से जुड़े आंकड़े शामिल हैं। ये रिपोर्टें सीलबंद लिफाफे में पेश की गई हैं, ताकि इनमें मौजूद संवेदनशील व्यावसायिक डेटा गोपनीय बना रहे। कोर्ट ने कंपनियों की रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया है और अब इस पर विस्तृत विचार-विमर्श किया जाएगा। इस मामले पर अगली सुनवाई 15 सितंबर को होनी है। उस दिन यह उम्मीद है कि रिपोर्ट में दिए गए आंकड़ों और तर्कों पर गहन चर्चा होगी।


 

आगे क्या?

हाईकोर्ट का यह कदम जबलपुर के लिए उम्मीद की किरण लेकर आया है। यदि कोर्ट विमानन कंपनियों के तर्कों से संतुष्ट नहीं होता है तो वह उन्हें जबलपुर से एयर कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाने का निर्देश दे सकता है। शहर के लोग और व्यापारिक संगठन उम्मीद कर रहे हैं कि न्यायिक हस्तक्षेप से जबलपुर को उसका सही स्थान मिलेगा और हवाई सेवाओं में सुधार होगा, जिससे शहर के विकास को नई गति मिलेगी।