जबलपुर। प्रदेश के श्रमजीवी पत्रकार और सरकार के बीच स्वास्थ्य बीमा योजना को लेकर बड़ा टकराव शुरू हो गया है। मध्यप्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संघ ने सीधे मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन देकर बीमा प्रीमियम में की गई भारी वृद्धि और उस पर लगाए गए 18 प्रतिशत जीएसटी को तुरंत वापस लेने की मांग की है। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि 3 दिन के भीतर उनकी मांग पूरी नहीं होती है, तो वे सरकार की इस योजना को पूरी तरह से नकार देंगे। ज्ञापन सौंपते समय म.प्र. श्रमजीवी पत्रकार संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष राजेश द्विवेदी, जबलपुर संभागीय अध्यक्ष राजेंद्र मिश्रा, जबलपुर जिला अध्यक्ष स्वप्निल पटेल, महासचिव नीरज कमल अवस्थी, आकाश बर्मन, कदीर अंसारी, कलीम हनफी, सोमेश ठाकुर सहित अन्य साथी पत्रकार उपस्थित रहे।

कलेक्टर को विदाई, सरकार को अल्टीमेटम
यह घटनाक्रम आज तब हुआ जब मध्यप्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संघ की जिला इकाई ने कलेक्टर दीपक सक्सेना को मुख्यमंत्री के नाम एक कड़ा ज्ञापन सौंपा। संयोगवश, यह बैठक श्री सक्सेना की जबलपुर में अंतिम बैठक थी, क्योंकि वे अब जनसंपर्क आयुक्त के रूप में भोपाल में पदभार ग्रहण किया। संघ ने उन्हें बुके भेंट कर बधाई दी, लेकिन साथ ही सरकार के खिलाफ अपना कड़ा रुख भी स्पष्ट कर दिया।

क्या है पत्रकारों की प्रमुख मांग?
ज्ञापन में संघ ने कहा है कि सरकार ने पत्रकार कल्याण बीमा योजना में अधिमान्य और गैर-अधिमान्य पत्रकारों के लिए प्रीमियम की राशि बेतहाशा बढ़ा दी है। इस पर 18 प्रतिशत जीएसटी भी लगाया गया है, जिससे कई पत्रकार, खासकर वे जिन्हें संस्थानों से आर्थिक मदद नहीं मिलती, बीमा का लाभ नहीं ले पाएंगे।

संघ की दो टूक मांगें हैं
बढ़ी हुई प्रीमियम राशि और 18ः जीएसटी को तत्काल शून्य किया जाए।
राज्य में पत्रकारों के लिए 5 लाख रुपये तक की स्वास्थ्य बीमा योजना को पूरी तरह से निःशुल्क लागू किया जाए। संघ ने सरकार को खुली चेतावनी देते हुए कहा है, ष्यदि 3 दिनों में हमारी मांगों का निराकरण नहीं होता है, तो हम सरकार की बीमा योजना को पूरी तरह अस्वीकार करने के लिए बाध्य होंगे।ष् इसके साथ ही, आवेदन की अंतिम तिथि 22 सितंबर से बढ़ाकर 30 सितंबर करने की मांग भी की गई है, ताकि सरकार के निर्णय के बाद संगठन आगे की रणनीति तय कर सके।