खाद संकट पर विपक्ष का सरकार पर करारा हमला, उमंग सिंघार बोले- 'दिक्कत कमी की नहीं, मैनेजमेंट की है'
भोपाल, मध्य प्रदेश - प्रदेश में खाद संकट और किसानों पर हुए लाठीचार्ज को लेकर राजनीति गरमा गई है। नेता प्रतिपक्ष श्री उमंग सिंघार ने आज भोपाल में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने केंद्र सरकार के आधिकारिक आँकड़े पेश करते हुए दावा किया कि राज्य में खाद की कोई कमी नहीं थी, बल्कि यह पूरी तरह से कुप्रबंधन और लापरवाही का नतीजा है।
प्रेस वार्ता में सिंघार ने हाल ही में हुई दो बड़ी घटनाओं का जिक्र किया:
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8 सितंबर 2025 को भिंड की "व्रहत्कार सहकारी संस्था" में खाद के लिए लगी लंबी कतारों में खड़े किसानों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया।
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2 सितंबर 2025 को रीवा की "करहिया मंडी" में भी खाद वितरण को लेकर हुए हंगामे के बाद पुलिस ने किसानों पर लाठियाँ बरसाईं।
सरकार के दावे झूठे, खाद सरप्लस में थी
उमंग सिंघार ने केंद्रीय रसायन और उर्वरक मंत्रालय द्वारा लोकसभा में दिए गए जवाब (25.07.2025) और मासिक बुलेटिन का हवाला दिया। उन्होंने बताया कि पिछले तीन सालों में मध्यप्रदेश में यूरिया और डीएपी की उपलब्धता, खपत से कहीं अधिक रही है।
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तीन सालों में कुल बची हुई खाद: 16.25 लाख मीट्रिक टन यूरिया और 7.11 लाख मीट्रिक टन डीएपी।
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मई-जून 2025 के मासिक बुलेटिन में भी डीएपी और यूरिया की उपलब्धता खपत से अधिक दर्ज की गई।
इन आँकड़ों के आधार पर सिंघार ने जोर देकर कहा कि समस्या खाद की कमी नहीं, बल्कि इसके वितरण और प्रबंधन में सरकार की नाकामी थी।
कृषि अर्थव्यवस्था की अनदेखी और भाजपा पर सवाल
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि मध्य प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ कृषि है, जिसका प्रदेश की जीडीपी में 45% से अधिक योगदान है। उन्होंने कहा कि इतनी महत्वपूर्ण होने के बावजूद किसानों को परेशान होना पड़ रहा है।सिंघार ने भाजपा के शीर्ष नेतृत्व पर भी सीधे सवाल उठाए। उन्होंने कहा, "मोहन यादव, शिवराज सिंह चौहान और जे.पी. नड्डा — तीनों मिलकर भी किसानों की समस्या हल नहीं कर पा रहे, या फिर इन्हीं के बीच तालमेल की भारी कमी है।" उन्होंने कहा कि 1.50 लाख करोड़ रुपये से अधिक का बजट और मंत्रालय की जिम्मेदारी भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा के पास होने के बावजूद, किसानों तक खाद न पहुँचना सरकार की सबसे बड़ी नाकामी है। उमंग सिंघार ने अपने वक्तव्य का समापन करते हुए कहा, “आज किसानों पर लाठी चल रही है, कल यही किसान वोट से हिसाब चुकाएँगे। दिक्कत खाद की कमी में नहीं, बल्कि प्रदेश सरकार की प्लानिंग और मैनेजमेंट की नाकामी में है।”
सरकार की नाकामी के ठोस कारण
सिंघार ने सरकार की असफलता के पीछे तीन मुख्य कारण बताए:
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माँग निर्धारण में लापरवाही: खरीफ और रबी सीजन के लिए कोई वैज्ञानिक आकलन नहीं किया गया और ज़िला स्तर से वास्तविक आवश्यकता नहीं जुटाई गई।
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तीन विभागों में तालमेल की कमी: कृषक कल्याण, सहकारिता और म.प्र. एग्रो इंडस्ट्रीज़ जैसे तीन विभाग जिम्मेदारी के बावजूद एक-दूसरे से तालमेल नहीं बिठा पाए।
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कालाबाज़ारी पर कार्रवाई का अभाव: ‘Essential Commodities Act, 1955’ के तहत पूरा अधिकार होने के बावजूद, सरकार ने कालाबाज़ारी पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।
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