इलाज से पहले धैर्य की परीक्षा: नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज में मरीजों की भारी भीड़, टोकन और पर्ची के लिए घंटों इंतजार
जबलपुर। प्रदेश के बड़े और प्रमुख सरकारी चिकित्सा संस्थानों में शामिल नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज इन दिनों अव्यवस्था और भीड़भाड़ से जूझ रहा है। अस्पताल में इलाज कराने आने वाले मरीजों और उनके परिजनों को इलाज से पहले ही घंटों की कड़ी परीक्षा से गुजरना पड़ रहा है। सुबह से ही टोकन लेने और पर्ची कटवाने के लिए इतनी लंबी कतारें लग जाती हैं कि मरीजों को अपनी बारी आने में कई-कई घंटे खड़े रहना पड़ता है।
सुबह से लग जाती है भीड़, टोकन पाना मुश्किल
जबलपुर और आसपास के जिलों से रोजाना हजारों मरीज इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज पहुंचते हैं। ओपीडी काउंटर पर टोकन और पर्ची के लिए सुबह तड़के ही लोगों की लाइन लग जाती है। कई मरीज और उनके परिजन सुबह 5 बजे तक पहुंच जाते हैं, लेकिन 9–10 बजे तक भी उनकी बारी नहीं आती। वृद्ध और गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों के लिए यह इंतजार बेहद कष्टदायक है। कई बार मरीजों को लाइन में खड़े-खड़े चक्कर आने तक की नौबत आ जाती है।
बैठने की जगह नहीं, अव्यवस्था हावी
मरीजों और परिजनों का कहना है कि अस्पताल परिसर में भीड़ को संभालने के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। बैठने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से लोग खुले मैदान या फर्श पर बैठने को मजबूर हैं। पर्ची बनाने और टोकन देने वाले काउंटरों की संख्या बेहद कम है, जबकि रोजाना मरीजों की संख्या हजारों में पहुंच जाती है। अव्यवस्था के कारण कई बार धक्का-मुक्की और बहस की नौबत भी आ जाती है।
डिजिटल सिस्टम भी नाकाम
सरकारी दावों के अनुसार ऑनलाइन पंजीकरण और डिजिटल टोकन सिस्टम लागू है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी कहती है। परिजनों का कहना है कि ऑनलाइन स्लॉट अक्सर उपलब्ध नहीं होते और जो लोग ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करा भी लेते हैं, उन्हें भी लाइन में लगना पड़ता है।
मरीजों का दर्द
इलाज के लिए आए ग्रामीण इलाकों के मरीजों ने बताया कि यात्रा में कई घंटे लगने के बाद जब वे अस्पताल पहुंचते हैं तो लाइन में और कई घंटे खड़े रहना पड़ता है। कई मरीजों को उसी दिन डॉक्टर तक पहुंचना भी मुश्किल हो जाता है और उन्हें अगले दिन फिर से आना पड़ता है। यह प्रक्रिया न केवल समय और धन की बर्बादी है बल्कि गंभीर बीमार मरीजों के लिए जानलेवा भी साबित हो सकती है।
प्रशासन के दावे
अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए अतिरिक्त काउंटर खोलने और स्टाफ बढ़ाने की योजना बनाई जा रही है। डिजिटल टोकन और ऑनलाइन पंजीकरण को बेहतर करने पर भी काम चल रहा है।
बड़ा सवाल – कब सुधरेगी व्यवस्था?
नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज पूरे महाकौशल क्षेत्र का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल है, जहां न केवल जबलपुर बल्कि आसपास के जिलों से भी हजारों मरीज रोज पहुंचते हैं। ऐसे में इलाज से पहले ही घंटों की मशक्कत और अव्यवस्था सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
स्थानीय लोग और सामाजिक संगठनों की मांग है कि सरकार तत्काल अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध कराए, काउंटर बढ़ाए और टोकन वितरण प्रणाली को दुरुस्त करे, ताकि मरीजों को इलाज के पहले ही थकान और परेशानी का सामना न करना पड़े। फिलहाल, मरीज और उनके परिजन इलाज से पहले ही लंबी लाइन और इंतजार के कारण भारी परेशानी झेलने को मजबूर हैं।
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