जबलपुर। पुलिस महानिदेशक लोकायुक्त योगेश देशमुख के निर्देश पर जबलपुर लोकायुक्त इकाई ने गुरुवार को मंडला जिले में बड़ी ट्रैप कार्रवाई करते हुए जनजातीय कार्य विभाग के सहायक यंत्री को 20 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे विशेष अभियान का हिस्सा है।

मामला कैसे शुरू हुआ

आवेदक रौशन कुमार तिवारी (34), निवासी ए-25 पौराधार, नगर परिषद डूमरकछार, अनुपपुर (वर्तमान पता– एस.एन. ठाकुर, नारायणगंज, मंडला) ने लोकायुक्त को लिखित शिकायत दी थी कि उनकी फर्म बोरिंग बिल्डर्स ने वर्ष 2024 में आदिवासी जनजातीय विभाग मंडला में रिपेयर एवं मेंटेनेंस का काम किया था। बिल भुगतान के लिए विभागीय सहायक यंत्री नरेन्द्र कुमार गुप्ता (61) लगातार 56,000 रुपये की रिश्वत की मांग कर रहा था।

आवेदक ने बताया कि गुप्ता बार-बार दबाव बनाकर कह रहा था कि बिना पैसा दिए बिल पारित नहीं होगा। तंग आकर आवेदक ने इसकी शिकायत लोकायुक्त जबलपुर इकाई से की।

ट्रैप की पूरी कार्रवाई

शिकायत के बाद लोकायुक्त टीम ने गुरुवार 11 सितंबर 2025 को योजना बनाई। टीम ने पहले आवेदक से तय राशि का हिस्सा—20,000 रुपये—पंच गवाहों के सामने रासायनिक पाउडर से चिन्हित कराए। तय समय पर आवेदक जनजातीय कार्य विभाग के कार्यालय, जिला मंडला पहुंचा और गुप्ता को रकम सौंपी। जैसे ही गुप्ता ने पैसे अपने कब्जे में लिए, लोकायुक्त टीम ने उसे रंगे हाथ दबोच लिया।

कार्रवाई के दौरान आरोपी के हाथों में रासायनिक पाउडर के निशान मिलने पर रिश्वत लेने की पुष्टि हुई। टीम ने मौके से 20,000 रुपये बरामद कर पूरे घटनाक्रम को दस्तावेजबद्ध किया।

लोकायुक्त की सख्ती

लोकायुक्त पुलिस ने आरोपी सहायक यंत्री नरेन्द्र कुमार गुप्ता को गिरफ्तार कर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया है। पूछताछ के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। लोकायुक्त अधिकारियों ने बताया कि आवेदक से मांगी गई 56,000 रुपये की अवैध मांग का सबूत मिलने पर आगे और धाराएं भी जोड़ी जा सकती हैं।

भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस

पुलिस महानिदेशक लोकायुक्त योगेश देशमुख ने कहा कि सरकारी कर्मचारियों द्वारा रिश्वत मांगने की कोई भी शिकायत गंभीरता से ली जाएगी। जनता से अपील है कि किसी भी विभागीय अधिकारी या कर्मचारी द्वारा अवैध मांग किए जाने पर तुरंत लोकायुक्त कार्यालय से संपर्क करें।

जिले में चर्चा का विषय

दिनदहाड़े हुई इस कार्रवाई से मंडला जिला मुख्यालय में हड़कंप मच गया। विभागीय दफ्तरों में लोकायुक्त की छापेमारी की चर्चा पूरे दिन चलती रही। आम नागरिकों और ठेकेदारों ने लोकायुक्त की तत्परता की सराहना की और उम्मीद जताई कि ऐसी सख्त कार्रवाइयों से सरकारी दफ्तरों में रिश्वतखोरी पर अंकुश लगेगा।